इस्लामाबाद. दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई सैन्य झड़पें अब एक ‘अघोषित युद्ध’ का रूप ले चुकी हैं। डूरंड रेखा (Durand Line) पर दोनों देशों की सेनाएं भारी हथियारों और आर्टिलरी का उपयोग कर रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है।
मुख्य बिंदु: अब तक क्या हुआ?
हालिया तनाव ने तब हिंसक रूप ले लिया जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर घुसकर हवाई हमले (Airstrikes) किए। इसके जवाब में अफगान तालिबान ने अपनी ‘बदरी यूनिट’ और भारी सैन्य टुकड़ियों को सीमा पर तैनात कर दिया है।
1. ऑपरेशन गजब-लिल-हक (Operation Ghazab-lil-Haq)
पाकिस्तान ने सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों को रोकने के नाम पर ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ शुरू किया है। पाकिस्तानी वायुसेना ने नांगरहार, कुनार और पक्तिका प्रांतों में संदिग्ध टीटीपी (TTP) ठिकानों को निशाना बनाया है।
2. तालिबान का पलटवार और भारी गोलाबारी
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में 27 सैन्य चौकियों को ध्वस्त कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान के लड़ाकों ने डूरंड रेखा के पास कई रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है, जिससे पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
3. हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि
सूत्रों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। जहाँ पाकिस्तान का दावा है कि उसने 400 से अधिक लड़ाकों को मार गिराया है, वहीं तालिबान ने 80 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की बात कही है। हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों से इन आंकड़ों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
तनाव के पीछे के 3 असली कारण
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह दुश्मनी नई नहीं है, लेकिन 2026 में इसने उग्र रूप ले लिया है:
-
टीटीपी (TTP) का मुद्दा: पाकिस्तान का आरोप है कि ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ के आतंकी अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रहे हैं।
-
डूरंड रेखा विवाद: अफगानिस्तान कभी भी ब्रिटिश काल की डूरंड रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा स्वीकार नहीं करता। तालिबान का कहना है कि यह सीमा पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांटती है।
-
सीमा पर बाड़बंदी: पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाई जा रही कंटीली बाड़ को तालिबान के लड़ाके अवैध मानते हैं और इसे कई जगहों से उखाड़ फेंकने की घटनाएं सामने आई हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत पर प्रभाव
इस युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक शक्तियों की चिंता बढ़ा दी है।
-
रूस और चीन: दोनों देशों ने संयम बरतने की अपील की है। विशेष रूप से चीन चिंतित है क्योंकि उसका CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) प्रोजेक्ट इस अस्थिरता से प्रभावित हो सकता है।
-
भारत की नजर: भारत इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है। सीमा पर तनाव बढ़ने से शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय आतंकवाद के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
क्या शांति की कोई गुंजाइश है?
वर्तमान में कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है।
Matribhumisamachar


