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स्पेस वॉरफेयर में इजरायल का बड़ा कदम: अंतरिक्ष से दुश्मनों पर अचूक निशाना लगाएगी ‘स्पेस लेजर टेक्नीक’

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येरुशलम | बुधवार, 1 जुलाई 2026

ईरान और अन्य क्षेत्रीय ताकतों के साथ जारी भारी तनाव के बीच, इजरायल ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज (Israel Katz) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इजरायल एक बेहद एडवांस स्पेस लेजर टेक्नीक (Space Laser Technique) पर काम कर रहा है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में सीधे हमला करने और दुश्मन की संपत्तियों को नष्ट करने की अभूतपूर्व सैन्य क्षमता (Space Warfare Capability) विकसित करना है।

मिलिट्री रिपोर्टर्स के साथ बातचीत में इजराइल काट्ज ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उन्होंने मिलकर देश के लिए कुछ बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण टारगेट यह है कि इजरायल के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों को इस सीक्रेट प्रोजेक्ट से जोड़ा जाए। उनका कहना था, “फिलहाल दुनिया के किसी भी देश के पास अंतरिक्ष में सीधे और पूर्ण रूप से हमला करने की ऑपरेशनल क्षमता नहीं है, लेकिन इजरायल इस क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना चाहता है।”

क्या है स्पेस लेजर वेपन? (What is Space Laser Weapon?)

स्पेस लेजर वेपन मूल रूप से एक डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन (Directed-Energy Weapon – DEW) है। इसे पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में तैनात सैटेलाइट्स या स्पेसक्राफ्ट पर स्थापित करने के लिए डिजाइन किया जाता है। यह तकनीक अत्यधिक केंद्रित (Highly Concentrated) लेजर ऊर्जा की बीम का उपयोग करके अपने टारगेट को पंगु (Disable), क्षतिग्रस्त (Damage) या पूरी तरह तबाह कर सकती है।

इन लेजर हथियारों के मुख्य टारगेट में शामिल हो सकते हैं:

  1. दुश्मन के जासूसी और संचार सैटेलाइट्स (Spy & Communication Satellites)

  2. इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs)

  3. मिलिट्री ड्रोन्स और एडवांस एयरक्राफ्ट

  4. जमीन पर मौजूद रणनीतिक कमांड सेंटर्स

अंतरिक्ष में लेजर थ्योरी क्यों है सबसे घातक?

थ्योरी के हिसाब से, पृथ्वी के वायुमंडल (Atmosphere) में धूल, बादल और हवा के कारण लेजर बीम कमजोर हो जाती है। लेकिन अंतरिक्ष में पूरी तरह से ‘वैक्यूम’ (शून्य) होने के कारण लेजर बीम बिना किसी रुकावट या कमजोरी के प्रकाश की गति (Speed of Light) से यात्रा करती है। बीम की क्वालिटी और ट्रैकिंग सटीकता के आधार पर इसकी मारक क्षमता कुछ सौ किलोमीटर से लेकर कई हजार किलोमीटर तक हो सकती है।

एरो 3 और आयरन बीम: इजरायल की वर्तमान ताकत

विदेशी रक्षा विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स की मानें तो इजरायल इस रेस में शून्य से शुरुआत नहीं कर रहा है। उसके पास पहले से ही दो ऐसी तकनीकें हैं जो इस स्पेस लेजर प्रोजेक्ट की रीढ़ बन सकती हैं:

  • एरो 3 मिसाइल सिस्टम (Arrow 3 Missile System): यह इजरायल का सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) जाकर बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों का दावा है कि इजरायल के पास एरो 3 के जरिए दुश्मन के सैटेलाइट्स को सीधे निशाना बनाने की ‘एंटी-सैटेलाइट’ (ASAT) क्षमता पहले से ही मौजूद हो सकती है।

  • आरण बीम (Iron Beam): इजरायल ने हाल के वर्षों में जमीन पर आधारित लेजर डिफेंस सिस्टम ‘आरण बीम’ का सफल परीक्षण किया है, जो रॉकेटों और ड्रोन्स को लेजर से मार गिराता है। इसी ग्राउंड-बेस्ड लेजर तकनीक को अब स्पेस-बेस्ड तकनीक में अपग्रेड करने की तैयारी है।

वैश्विक स्पेस वॉरफेयर और बड़े देशों की होड़

इजरायल का यह बड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में वेपनाइजेशन ऑफ स्पेस (Weaponization of Space) यानी अंतरिक्ष के सैन्यीकरण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। वर्तमान में दुनिया की महाशक्तियां इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं:

  • रूस और चीन: इन दोनों देशों के पास अंतरिक्ष में मलबे को नियंत्रित करने और सैटेलाइट्स को मैनिपुलेट करने का लंबा अनुभव है। चीन के पास ऐसे रोबोटिक सैटेलाइट्स हैं जो दूसरे सैटेलाइट्स को कक्षा से खींच सकते हैं। वहीं रूस ने ‘पेरेस्वत’ (Peresvet) जैसे ग्राउंड-बेस्ड लेजर सिस्टम विकसित किए हैं जो विदेशी सैटेलाइट्स को ‘ब्लाइंड’ कर सकते हैं।

  • अमेरिका: अमेरिकी स्पेस फोर्स लगातार ऐसी तकनीकों पर काम कर रही है जो अंतरिक्ष में मौजूद अपने एसेट्स की रक्षा कर सकें और लेजर-बेस्ड डिफेंस को मजबूत कर सकें।

  • भारत: भारत ने भी साल 2019 में ‘मिशन शक्ति’ के तहत अपनी एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल क्षमता का सफल प्रदर्शन कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी।

स्पेस लेजर के अन्य उपयोग और ‘अंतरिक्ष मलबे’ की चुनौती

इस तकनीक का इस्तेमाल केवल विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच के रूप में भी देखा जा रहा है। विदेशी रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेस लेजर तकनीक का उपयोग अंतरिक्ष में हमलों के बाद या पुराने सैटेलाइट्स के टूटने से बनने वाले मलबे (Space Debris) को नष्ट करने में भी किया जा सकता है।

वर्तमान में अंतरिक्ष में तैर रहा लाखों टन मलबा चालू सैटेलाइट्स और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए बड़ा खतरा है। अगर लेजर की मदद से इस मलबे को कक्षा में ही जलाकर नष्ट किया जा सके, तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के लिए वरदान साबित होगा। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि मलबे को हटाने के नाम पर विकसित की जा रही तकनीक का इस्तेमाल युद्ध के समय दुश्मन के एक्टिव सैटेलाइट्स को जाम करने या नष्ट करने के लिए आसानी से किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इजरायल द्वारा स्पेस लेजर वेपन की दौड़ में सबसे आगे निकलने की घोषणा ने वैश्विक रक्षा समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। बिना बारूद के, प्रकाश की गति से हमला करने वाले ये हथियार भविष्य के युद्धों की रूपरेखा तय करेंगे। अब देखना यह है कि अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण रखने के लिए बनाई गई अंतरराष्ट्रीय संधियां (जैसे 1967 की Outer Space Treaty) इन घातक तकनीकों के विकास को किस हद तक नियंत्रित रख पाती हैं।

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