काबुल । बुधवार, 01 जुलाई 2026
दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक अभूतपूर्व सैन्य कदम उठाते हुए पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर हवाई और ड्रोन हमले (Air and Drone Strikes) किए। अफगान रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक दावों के अनुसार, इस जवाबी सैन्य ऑपरेशन में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांतों में सक्रिय आतंकी संगठन दाएश (ISIS-K) के संयुक्त केंद्रों को निशाना बनाकर जमींदोज कर दिया गया है।
यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अफगान सीमा के भीतर किए गए हमलों का करारा जवाब मानी जा रही है, जिससे दोनों परमाणु-पड़ोसी देशों के बीच पूर्ण युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
इन इलाकों में अफगान वायुसेना ने बरसाए बम-गोले
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, अफगान एयरफोर्स ने अत्यंत आधुनिक ड्रोन्स और लड़ाकू विमानों की मदद से पाकिस्तानी संप्रभुता के भीतर सटीक (Precision) हमले किए। मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया:
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बलूचिस्तान (पिशिन जिला): पिशिन के सरनान इलाके में स्थित एक स्कूल और संयुक्त केंद्र को नष्ट कर दिया गया। तालिबान का दावा है कि इस स्कूल का इस्तेमाल ISIS के आतंकी अपने गुप्त हेडक्वार्टर के रूप में कर रहे थे।
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खैबर पख्तूनख्वा (ओरकजई जिला): केपी के कंबर खेल क्षेत्र में दाएश (ISIS-K) के मुख्य ठिकानों पर बमबारी की गई।
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चित्राल (शाह सलीम घाटी): चित्राल के गरम चश्मा और शाह सलीम घाटी में स्थित आतंकियों के समन्वय केंद्रों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।
अफगान रक्षा मंत्रालय का बयान: “इन ठिकानों का उपयोग अफगानिस्तान के भीतर मासूम नागरिकों के खिलाफ हमलों और तोड़-फोड़ की साजिश रचने के लिए किया जा रहा था। इस कार्रवाई में किसी भी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है, जबकि आतंकियों का भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।”
पाकिस्तान की कार्रवाई का लिया गया बदला
दरअसल, यह विवाद तब और भड़क गया जब 28 और 29 जून को पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान का दावा था कि उसने ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) के आतंकियों को मारा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) और अफगान विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान के इस गैर-जिम्मेदाराना हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 36 निर्दोष अफगान नागरिकों की मौत हो गई और 160 से अधिक लोग घायल हो गए। इसी का प्रतिशोध लेने के लिए तालिबान ने ठीक दो दिन बाद पाकिस्तान के घर में घुसकर एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया।
भारत और रूस ने पाकिस्तान को घेरा: वैश्विक प्रतिक्रियाएं
इस बड़े सैन्य संकट पर वैश्विक महाशक्तियों और क्षेत्रीय देशों ने कड़ी चिंता व्यक्त की है:
1. भारत का कड़ा रुख: पाकिस्तान की आक्रामकता की निंदा
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का खुला समर्थन करते हुए पाकिस्तान की शुरुआती एयरस्ट्राइक की तीव्र भर्त्सना की। भारत ने इसे “आक्रामकता का खुला कृत्य” (Blatant act of aggression) करार दिया। नई दिल्ली ने कहा कि यह हमला पाकिस्तान के अपने आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने और सीमा पार हिंसा को बढ़ावा देने के पुराने ढर्रे को उजागर करता है।
2. रूस की नसीहत: बंदूक छोड़ें, कूटनीति अपनाएं
वहीं, रूस के विदेश मंत्रालय (मॉस्को) ने दोनों देशों से तुरंत युद्धविराम की अपील की है। क्रेमलिन ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इस सैन्य टकराव का सबसे गंभीर खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। रूस ने नसीहत दी है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान को कूटनीतिक रास्तों और बातचीत के जरिए अपने डूरंड रेखा (Durand Line) से जुड़े विवादों को सुलझाना चाहिए।
क्या पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं दोनों देश?
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के बाद इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि दोनों देशों के रिश्ते सुधरेंगे। हालांकि, डूरंड रेखा विवाद और पाकिस्तान में बढ़ते आतंकी हमलों (जिसका आरोप वह TTP पर लगाता है) ने दोनों को जानी दुश्मन बना दिया है।
तालिबान सरकार ने अब साफ चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान की सुरक्षा को खतरा पैदा करने वाले हर पाकिस्तानी या आतंकी ठिकाने को चुन-चुनकर निशाना बनाया जाएगा। इस ताजा सैन्य मोड़ ने मध्य और दक्षिण एशिया के सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
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