नई दिल्ली | रविवार, 3 मई 2026
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जवाद अहमद सिद्दीकी की नियमित जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने शनिवार (2 मई 2026) को दिए अपने 85 पन्नों के आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया साक्ष्य बताते हैं कि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का सीधा संबंध आरोपी से है।
शिक्षा की आड़ में ‘व्हाइट कॉलर’ धोखाधड़ी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में अल फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। ED के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) से मान्यता प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित हथकंडे अपनाए:
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घोस्ट फैकल्टी (On-Paper Faculty): डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि मेडिकल कॉलेज ने 70 से अधिक ऐसे डॉक्टरों को नियुक्त दिखाया जो वास्तव में वहां काम नहीं करते थे। इन्हें केवल निरीक्षण के समय उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भुगतान किया जाता था।
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फर्जी मरीज और रिकॉर्ड: निरीक्षण से ठीक पहले अस्पताल में फर्जी मरीजों को भर्ती किया गया ताकि कॉलेज को क्रियाशील दिखाया जा सके।
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भ्रामक मान्यता: यूनिवर्सिटी ने छात्रों को लुभाने के लिए ‘NAAC’ की पुरानी मान्यता और UGC की धारा 12(B) के झूठे दावे किए।
₹493.24 करोड़ की अवैध कमाई और संपत्तियों की कुर्की
ED ने इस पूरे घोटाले के वित्तीय ढांचे का विवरण साझा किया है:
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कुल अवैध कमाई: जांच एजेंसी ने अब तक ₹493.24 करोड़ की पहचान की है, जो छात्रों से फीस के रूप में वसूली गई थी।
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संपत्ति कुर्की: अब तक ₹179.4 करोड़ (कुछ रिपोर्टों में ₹139 करोड़ से ₹144 करोड़ के बीच का उल्लेख है) की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं, जिनमें यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ जमीन, भवन, बैंक बैलेंस और शेयर शामिल हैं।
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शेल कंपनियां: धन शोधन के लिए आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, कारकून कंस्ट्रक्शन और दियाला कंस्ट्रक्शन जैसी परिवार नियंत्रित फर्मों का उपयोग किया गया।
लाल किला ब्लास्ट और आतंकी कनेक्शन
यह मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर हुए कार ब्लास्ट की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर यह यूनिवर्सिटी आई थी।
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यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टर (मुजम्मिल अहमद गनई, शाहीन सईद और उमर-उन-नबी) आतंकी मॉड्यूल के संदिग्धों के रूप में उभरे।
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उमर-उन-नबी को कथित तौर पर उस विस्फोटक से लदी कार का चालक बताया गया है जिसने धमाका किया था।
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आरोप है कि सिद्दीकी ने बिना किसी पुलिस सत्यापन के इन संदिग्धों को यूनिवर्सिटी में पनाह और पद दिए।
अदालत की टिप्पणी
साकेत कोर्ट ने कहा कि सिद्दीकी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धर्मार्थ और शैक्षणिक संस्थानों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक लाभ के लिए ‘उपकरण’ के रूप में इस्तेमाल किया। अदालत ने धन के “लेयरिंग और इंटीग्रेशन” के स्पष्ट पैटर्न को मनी लॉन्ड्रिंग के मानकों के अनुरूप पाया।
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