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अंकित शर्मा हत्याकांड: 6 साल बाद क्या मिलेगा न्याय? कड़कड़डूमा कोर्ट 7 जुलाई को सुनाएगी ऐतिहासिक फैसला

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नई दिल्ली । गुरुवार, 11 जून 2026

वर्ष 2020 में देश की राजधानी को दहला देने वाले उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक, आईबी (Intelligence Bureau) कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अब फैसले की घड़ी आ गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत अब 7 जुलाई 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।

इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन सहित कुल 11 लोग आरोपी हैं। 6 साल पुराने इस दर्दनाक मामले पर न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलकों की नजरें भी टिकी हुई हैं।

क्या थी अंकित शर्मा हत्याकांड की पूरी घटना?

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में सुरक्षा सहायक (Security Assistant) के पद पर तैनात 26 वर्षीय युवा अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 की शाम को अचानक अपने घर के पास से लापता हो गए थे। उस समय उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांदबाग, जाफराबाद और खजूरी खास जैसे इलाकों में भीषण सांप्रदायिक हिंसा, पथराव और आगजनी हो रही थी।

अगले दिन यानी 26 फरवरी 2020 को चांदबाग क्षेत्र में स्थित एक गहरे नाले से अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अंकित के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने दयालपुर थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की गहन जांच शुरू की थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ था बर्बरता का खुलासा

अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, अंकित शर्मा की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी। उनके शरीर पर धारदार हथियारों से 51 से अधिक चोटों के निशान पाए गए थे। इसके अलावा, शव को छिपाने की नीयत से उनके चेहरे पर तेजाब डालकर उसे जलाने की कोशिश भी की गई थी, जिसके बाद शव को नाले में फेंक दिया गया।

अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट में करीब 650 पन्नों का आरोपपत्र (Charge Sheet) दाखिल किया था।

  • अभियोजन पक्ष का दावा: सरकारी पक्ष का सीधा आरोप है कि दंगों के दौरान पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की अगुवाई वाली उग्र भीड़ ने अंकित शर्मा को विशेष रूप से निशाना बनाया। भीड़ उन्हें जबरन खींचकर ले गई और उनकी हत्या कर दी। कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी करते हुए कहा था कि आरोपियों का सामान्य उद्देश्य हिंदुओं को निशाना बनाना था, और इसी साजिश के तहत अकेले पड़ गए अंकित शर्मा की हत्या की गई।

  • बचाव पक्ष का इनकार: वहीं दूसरी ओर, मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बचाव पक्ष का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष की भावना से प्रेरित है और उनके मुवक्किलों को झूठा फंसाया गया है। उनके मुताबिक, पुलिस के पास ऐसा कोई प्रत्यक्ष वीडियो साक्ष्य नहीं है जो आरोपियों को सीधे तौर पर हत्या करते हुए दिखाए।

पिछले 6 वर्षों में क्या-क्या हुआ? (मुख्य कानूनी घटनाक्रम)

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालतों ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।

  • सितंबर 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक युवा खुफिया अधिकारी की इस तरह की बर्बर हत्या के मामले में जमानत का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

  • जून 2026 (हालिया स्थिति): सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में मुकदमे की धीमी रफ्तार और गवाहों के बयानों को लेकर भी लंबी बहसें चली हैं। ताहिर हुसैन पिछले 6 वर्षों से लगातार न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।

अब कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। पहले इस मामले में फैसला 11 जून को आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अदालत ने अब फैसले के लिए 7 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

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