लखनऊ. इलाहाबाद हाई कोर्ट में वर्षों से लंबित मुकदमों के भारी बोझ को कम करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लिया है। 3 फरवरी 2026 को कॉलेजियम ने संविधान के अनुच्छेद 224-A के तहत 5 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को ‘तदर्थ न्यायाधीश’ (Ad-hoc Judges) के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
यह निर्णय Supreme Court of India के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant की अध्यक्षता में लिए गए कॉलेजियम की बैठक में हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला देश की न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए एक मॉडल उदाहरण बन सकता है।
🔴 सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला (फरवरी 2026)
कॉलेजियम ने Allahabad High Court के लिए जिन 5 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नामों को मंजूरी दी है, वे हैं:
- जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान
- जस्टिस मोहम्मद असलम
- जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी
- जस्टिस रेनू अग्रवाल
- जस्टिस ज्योत्स्ना शर्मा
नियुक्ति से जुड़े प्रमुख तथ्य
- कार्यकाल: 2 वर्ष
- नियुक्ति का उद्देश्य: हाई कोर्ट में लंबित मामलों, विशेषकर पुरानी आपराधिक अपीलों का शीघ्र निस्तारण
- अधिकार: तदर्थ न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीशों के समान ही न्यायिक शक्तियां और क्षेत्राधिकार प्राप्त होंगे
📜 अनुच्छेद 224-A: वर्षों बाद फिर सक्रिय हुआ संवैधानिक प्रावधान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 224-A उच्च न्यायालयों को यह अधिकार देता है कि वे राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अस्थायी अवधि के लिए न्यायिक कार्य सौंप सकें।
- यह प्रावधान लंबे समय तक लगभग निष्क्रिय रहा
- 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों के “डॉकेट एक्सप्लोजन” को देखते हुए इसे प्रभावी रूप से पुनर्जीवित किया
- नवीन दिशा-निर्देश: अब हाई कोर्ट अपनी स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता के 10% तक तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त कर सकते हैं
🏗️ इलाहाबाद हाई कोर्ट के लिए क्यों है यह फैसला बेहद अहम?
इलाहाबाद हाई कोर्ट देश का सबसे बड़ा हाई कोर्ट माना जाता है और यहां मामलों की पेंडेंसी भी सबसे अधिक है।
- लाखों लंबित मुकदमे: जिनमें बड़ी संख्या 5 से 10 साल से अधिक पुराने मामलों की है
- स्पेशल बेंच की भूमिका: तदर्थ न्यायाधीश मुख्य रूप से पुरानी आपराधिक अपीलों की सुनवाई करेंगे
- न्यायिक संतुलन: नियमित न्यायाधीशों को नए, संवैधानिक और जटिल मामलों पर अधिक समय देने का अवसर मिलेगा
कानूनी जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
📊 नियुक्ति प्रक्रिया: संक्षेप में
| चरण | विवरण |
|---|---|
| सिफारिश | इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नाम कॉलेजियम को भेजे गए |
| मंजूरी | 3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की स्वीकृति |
| अंतिम प्रक्रिया | केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी के बाद कार्यभार ग्रहण |
🔍 आगे क्या?
केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की औपचारिक स्वीकृति के बाद ये तदर्थ न्यायाधीश जल्द ही कार्यभार संभाल सकते हैं। इसके बाद हाई कोर्ट में लंबित मामलों, खासकर दशकों पुराने केसों के निस्तारण की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में 5 तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति न केवल न्यायिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए समय पर न्याय सुनिश्चित करने की उम्मीद भी जगाता है। आने वाले समय में यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो देश के अन्य हाई कोर्ट्स में भी इसे व्यापक रूप से अपनाया जा सकता है।
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