नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र के दौरान आज लोकसभा की कार्यवाही उस वक्त पूरी तरह बाधित हो गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘गद्दार’ शब्द ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया, जिसके चलते स्पीकर को कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
कैसे शुरू हुआ लोकसभा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील, राष्ट्रीय सुरक्षा और सिख समुदाय से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला।
इसी दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की ओर इशारा करते हुए उन्हें “गद्दार दोस्त (Traitor Friend)” कह दिया।
राहुल गांधी का तर्क
राहुल गांधी ने कहा कि जो नेता अपनी विचारधारा, राजनीतिक विरासत और सिद्धांतों को छोड़कर सत्ता के लिए पाला बदलते हैं, वे सिर्फ पार्टी ही नहीं बल्कि अपने पूर्वजों और इतिहास से भी विश्वासघात करते हैं।
उन्होंने इस बयान को नैतिक और वैचारिक आलोचना बताते हुए अपना पक्ष रखा।
बिट्टू का तीखा पलटवार
रवनीत सिंह बिट्टू इस टिप्पणी से बेहद आहत नजर आए। उन्होंने सदन में खड़े होकर कहा—
“मेरे दादा बेअंत सिंह ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। राहुल गांधी को इस शब्द के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। असली गद्दारी वह है जो विदेशी मंचों पर जाकर भारत की आलोचना करते हैं।”
सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष: हंगामा चरम पर
सत्ता पक्ष की ओर से भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के शब्दों को असंसदीय और अपमानजनक बताया। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पीकर से मांग की कि इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए।
वहीं कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी का खुलकर समर्थन किया। कांग्रेस सांसदों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि “सत्य कड़वा होता है” और सरकार आलोचना से घबराती है।
लोकसभा में कुछ देर तक “माफी मांगो” और “तानाशाही बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे।
स्पीकर की सख्ती, फिर भी नहीं थमा हंगामा
लगातार शोर-शराबे और व्यवधान के चलते स्पीकर ने सदस्यों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमा। हालात बिगड़ते देख लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
सियासी मायने और आगे की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 की राजनीति, विपक्ष की आक्रामक रणनीति और सरकार की जवाबी सख्ती का संकेत है। ‘गद्दार’ शब्द ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक तेज राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा कर दिया है।
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