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बिहार में युग का अंत: नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में सत्ता हस्तांतरण के संकेत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार की राजनीति में आज एक युग का अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता के धुरी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुबह 11:30 बजे राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यह नामांकन बिहार विधानसभा परिसर में होगा, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की औपचारिकताएं शुरू होने की संभावना है।

दिल्ली की राह पर नीतीश: अमित शाह भी रहेंगे मौजूद

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार के नामांकन को बेहद भव्य और राजनीतिक संदेश देने वाला बनाया जा रहा है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशेष रूप से पटना पहुंच सकते हैं। उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा उम्मीदवार नितिन नबीन भी मौजूद रहेंगे।

जानकारों का मानना है कि अमित शाह की मौजूदगी यह संकेत देती है कि एनडीए (NDA) के भीतर नीतीश कुमार के दिल्ली जाने और बिहार में सत्ता हस्तांतरण का फॉर्मूला पूरी तरह तय हो चुका है।

नए मुख्यमंत्री को लेकर हलचल तेज

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? * भाजपा का दावा: कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के खाते में जा सकती है।

  • नया समीकरण: जदयू के भीतर से भी किसी कद्दावर नेता या नीतीश कुमार के परिवार से किसी सदस्य को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चाएं आम हैं।

जदयू विधायक दल की आपात बैठक

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नीतीश कुमार अपने इस्तीफे की घोषणा कर सकते हैं और नए नेता के नाम पर मुहर लगाई जा सकती है।

अन्य उम्मीदवारों का नामांकन

आज केवल नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि जदयू के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर भी राज्यसभा के लिए अपना पर्चा दाखिल करेंगे। विपक्षी खेमे में भी इस हलचल को देखते हुए बैठकों का दौर शुरू हो गया है, जिससे बिहार की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है।

निष्कर्ष: करीब 20 साल तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार का दिल्ली जाना न केवल जदयू के लिए, बल्कि बिहार की पूरी राजनीतिक संरचना के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।