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वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप: मणिकर्णिका घाट जलमग्न, छतों पर अंतिम संस्कार करने को मजबूर हुए लोग

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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर गंगा नदी का पानी भरने के बाद नाव से शव ले जाते लोग और इमारतों की छतों पर अंतिम संस्कार का दृश्य।
वाराणसी । शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
वाराणसी (काशी) में पवित्र गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। गंगा का पानी चेतावनी बिंदु (70.262 मीटर) को पार कर खतरे के निशान (71.262 मीटर) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव धर्मनगरी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर पड़ा है, जिसका निचला हिस्सा पूरी तरह से पानी में डूब चुका है।

महाश्मशान पर प्रभावित हुई अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

काशी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर सामान्य दिनों में जिस स्थान पर चिताएं जलाई जाती थीं, वहां अब कई फीट गहरा पानी भर गया है। इस वजह से शवों का दाह संस्कार करने के लिए लोगों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनानी पड़ रही हैं:
  • इमारतों की छतों पर दाह संस्कार: घाट के जलमग्न होने के कारण शवों को आसपास बनी इमारतों और पक्के निर्माणों की छतों पर ले जाकर चिताएं सजानी पड़ रही हैं।
  • नावों का सहारा: घाट की गलियों में पानी भरने के कारण पैदल आवाजाही ठप हो चुकी है। शवयात्रा और परिजनों को चिता स्थल तक पहुंचाने के लिए नावों का प्रयोग किया जा रहा है।
  • आर्थिक बोझ और कठिनाई: जलभराव और नावों के इस्तेमाल से अंतिम संस्कार की लागत बढ़ गई है। साथ ही परिजनों को घुटनों तक भरे पानी, मलबे और फिसलन के बीच से गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीय जनजीवन और व्यापार पर गहरा असर

गंगा का जलस्तर लगभग 1 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने के कारण तटीय गलियों में पानी घुस गया है।
  1. घाटों का संपर्क टूटा: काशी के प्रमुख 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया है।
  2. आरती स्थल बदले गए: प्रसिद्ध गंगा आरती के स्थलों को जलभराव के कारण सड़क या इमारतों के ऊपरी हिस्सों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
  3. कारोबार प्रभावित: घाटों पर निर्भर पूजा सामग्री, फूल-माला और नौका चालकों के व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है।

प्रशासन की तैयारी और प्रधानमंत्री द्वारा समीक्षा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, NDRF और SDRF की टीमें अलर्ट पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के अधिकारियों और जिलाधिकारी से फोन पर वार्ता कर बाढ़ की स्थिति और राहत शिविरों का जायजा लिया। उन्होंने राहत सामग्री, दवाओं और बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: मणिकर्णिका घाट पर बाढ़ आने से अंतिम संस्कार कैसे हो रहा है?
उत्तर: घाट का निचला हिस्सा जलमग्न होने के कारण शवों को नावों के जरिए इमारतों की छतों पर ले जाया जा रहा है, जहां सुरक्षित स्थानों पर चिताएं जलाई जा रही हैं।
Q2: वाराणसी में गंगा नदी का वर्तमान जलस्तर क्या है?
उत्तर: गंगा नदी चेतावनी बिंदु (70.262 मीटर) को पार कर चुकी है और खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है।
Q3: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद के लिए संपर्क कहां करें?
उत्तर: स्थानीय नागरिक प्रशासन द्वारा स्थापित वाराणसी बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Varanasi Flood Control Room) या पुलिस हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख प्राकृतिक आपदा की स्थिति और समाचार रिपोर्टों के आधार पर जनहित में जानकारी प्रदान करने हेतु तैयार किया गया है। स्थानीय जलस्तर और राहत कार्य की ताजा जानकारी के लिए जिला प्रशासन के आधिकारिक बुलेटिन को प्राथमिकता दें।
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