नई दिल्ली । शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
देश भर के थाना परिसरों और पुलिस स्टेशनों में सुरक्षा व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद अहम और सख्त फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस स्टेशनों में निष्क्रिय या गायब CCTV कैमरों की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नई योजनाओं के लागू होने का इंतजार करना कतई उचित नहीं है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कहा कि ‘पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता’ (ASUMP) योजना में उपलब्ध मौजूदा धनराशि को बिना देरी इस्तेमाल में लाया जाए।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पुलिस स्टेशनों में कार्यशील (Functional) CCTV कैमरों की कमी और उनके उचित रखरखाव को लेकर सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र (Amicus Curiae) और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 को दायर अपने हलफनामे में एक नई अंब्रेला योजना ‘पुलिस आधुनिकीकरण मिशन’ (Police Modernisation Mission – PMM) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्तावित PMM योजना का कुल बजट अगले 5 वर्षों के लिए करीब ₹24,000 करोड़ रखा गया है, जिसमें पुलिस स्टेशनों के इंफ्रास्ट्रक्चर और CCTV कैमरों के लिए भी पर्याप्त बजट का प्रावधान किया जाना है। हालांकि, अदालत ने चिंता व्यक्त की कि नई योजना के प्रशासनिक व वित्तीय प्रक्रियाओं में समय लग सकता है, जिससे मौजूदा फंडिंग में रुकावट आ सकती है और उपलब्ध फंड लैप्स हो सकता है।
₹450 करोड़ का फंड उपलब्ध: कोर्ट ने जताई नाराजगी
केंद्र सरकार के हलफनामे के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 तक ASUMP योजना के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए लगभग ₹450 करोड़ की धनराशि उपलब्ध थी। इसमें से लगभग ₹225 करोड़ का ही इस्तेमाल हो सका है। वहीं दूसरी ओर, देश के विभिन्न राज्यों एवं UTs द्वारा CCTV से जुड़े बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए कुल ₹1,453.85 करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए हैं।
पीठ ने केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजा ठाकरे से सवाल किया:
“जब आपके पास ASUMP योजना के तहत पहले से फंड मौजूद है, तो उसे बेकार (Dormant) क्यों रहने दिया जा रहा है? जब तक नई योजना लागू नहीं हो जाती, तब तक मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए इस धनराशि का तत्काल उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता?”
झारखंड और राज्यों की स्थिति पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान राज्यों की लापरवाही भी उजागर हुई। सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अदालत को अवगत कराया कि कई राज्यों में CCTV कैमरों के रखरखाव और नए कैमरों की स्थापना में घोर लापरवाही बरती जा रही है। विशेष रूप से झारखंड का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया गया कि राज्य के पुलिस स्टेशनों में 2020 के बाद से एक भी नया CCTV कैमरा नहीं लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश
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तत्काल फंड का इस्तेमाल: केंद्र और राज्य सरकारें ASUMP योजना के बचे हुए फंड का इस्तेमाल CCTV इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने में तुरंत करें।
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2 सप्ताह का समय: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में आगे के निर्देश प्राप्त करने के लिए 2 सप्ताह की मोहलत दी है।
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अगल सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई के दौरान केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि ASUMP का शेष बजट CCTV कमियों को पूरा करने के लिए कैसे जारी किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस स्टेशन CCTV मामले में क्या फैसला दिया है?
उत्तर: कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुलिस स्टेशनों में CCTV व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए राज्यों के पास उपलब्ध ASUMP योजना के मौजूदा फंड का तुरंत इस्तेमाल किया जाए और नई PMM योजना के लागू होने का इंतजार न किया जाए।
Q2: ASUMP और PMM योजनाएं क्या हैं?
उत्तर: ASUMP (Assistance to States and Union Territories for Modernisation of Police) मौजूदा पुलिस आधुनिकीकरण योजना है, जबकि PMM (Police Modernisation Mission) केंद्र द्वारा प्रस्तावित ₹24,000 करोड़ की नई 5-वर्षीय योजना है।
Q3: CCTV से जुड़े प्रस्तावों के लिए कुल कितनी राशि की आवश्यकता जताई गई है?
उत्तर: विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा CCTV से जुड़ी कमियों और आधुनिकीकरण के लिए लगभग ₹1,453.85 करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह समाचार लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों, सरकारी हलफनामों तथा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। किसी भी कानूनी या आधिकारिक संदर्भ के लिए कृपया सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक आदेशों का अवलोकन करें।
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