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ग्रीन क्रैकर्स पर सुप्रीम कोर्ट में फ्रेश टेस्टिंग का मुद्दा: जानिए CSIR-NEERI और CPCB के बीच क्या है पूरा विवाद

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सुप्रीम कोर्ट भवन नई दिल्ली और पर्यावरण अनुकूल ग्रीन क्रैकर्स की प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली । गुरुवार, 3 सितंबर 2026
दिवाली से ठीक पहले एक बार फिर कम प्रदूषण वाले ‘ग्रीन क्रैकर्स’ (Green Crackers) को लेकर वैज्ञानिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में ग्रीन क्रैकर्स की नई formulations (फॉर्मूलों) को लेकर फ्रेश साइंटिफिक टेस्टिंग (Fresh Scientific Testing) की मांग सामने आई है। यह कदम देश की दो प्रमुख विशेषज्ञ संस्थाओं—CSIR-NEERI और CPCB—के बीच उपजे गहरे वैचारिक और वैज्ञानिक मतभेद के बाद उठाया गया है।
इस पूरे मामले का सीधा प्रभाव आगामी त्योहारों पर पटाखों के निर्माण, बाजार में उनकी बिक्री और आम जनता द्वारा उनके उपयोग पर पड़ना तय माना जा रहा है।

क्या है CSIR-NEERI बनाम CPCB का पूरा मामला?

इस विवाद के केंद्र में ग्रीन क्रैकर्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक घटक हैं:
  1. CSIR-NEERI की नई Formulations:
    वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) ने नई पीढ़ी के ग्रीन क्रैकर्स विकसित किए हैं। संस्थान का दावा है कि ये नए फॉर्मूले पारंपरिक पटाखों की तुलना में हवा में PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन को लगभग 30% तक कम करते हैं।
  2. CPCB की बेरियम Nitrate पर आपत्ति:
    दूसरी तरफ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इन नई formulations में बेरियम यौगिकों (विशेषकर Barium Nitrate) के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। CPCB का तर्क है कि बेरियम का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन करता है और यह स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है।

बेरियम नाइट्रेट (Barium Nitrate) क्यों बना विवाद का कारण?

पटाखों में हरा रंग पैदा करने और उन्हें बेहतर तरीके से जलाने के लिए बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, जलने के बाद इसके अवशेष हवा में अत्यधिक विषैले तत्व घोलते हैं, जिससे सांस की बीमारियां, त्वचा में जलन और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले ऐतिहासिक फैसलों में पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। ऐसे में CPCB का मानना है कि ‘ग्रीन’ का टैग लगाकर बेरियम के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

फ्रेश साइंटिफिक टेस्टिंग (Fresh Scientific Testing) से क्या पता चलेगा?

दोनों एजेंसियों के अलग-अलग वैज्ञानिक दावों को देखते हुए अब फ्रेश लैबोरेटरी और फील्ड टेस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित बिंदुओं को स्पष्ट करना है:
  • वास्तविक उत्सर्जन स्तर: नई formulations से हवा में छोड़े जाने वाले PM10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$) और नाइट्रोजन ऑक्साइड ($NO_x$) का वास्तविक स्तर क्या है।
  • पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव: इनमें प्रयुक्त रसायनों का दीर्घकालिक और अल्पकालिक प्रभाव इंसानों तथा वायु गुणवत्ता पर कैसा पड़ता है।
  • मानकों की प्रामाणिकता: क्या ये पटाखे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘पर्यावरण अनुकूल’ मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

यह मामला क्यों बेहद महत्वपूर्ण है?

इस कानूनी और वैज्ञानिक प्रक्रिया के नतीजे बेहद दूरगामी होंगे:
  • उत्पादकों और विक्रेताओं पर असर: यदि सुप्रीम कोर्ट विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर इन Formulations को हरी झंडी देता है, तो पटाखा उद्योग को राहत मिलेगी। इसके विपरीत, नकारात्मक रिपोर्ट आने पर बेरियम-युक्त सभी पटाखों पर प्रतिबंध और कड़ा कर दिया जाएगा।
  • दिवाली पर प्रदूषण नियंत्रण: विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में दिवाली के दौरान AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है। यह फैसला तय करेगा कि दिवाली पर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में ग्रीन क्रैकर्स कितने कारगर साबित होंगे।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जल्द ही नामांकित स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थानों की परीक्षण रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इस निष्पक्ष वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत अपना अंतिम फैसला सुनाएगी, जिससे ग्रीन क्रैकर्स के उत्पादन और नियमों पर स्थिति पूरी तरह से साफ हो सकेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) क्या होते हैं?
उत्तर: ग्रीन क्रैकर्स ऐसे पटाखे होते हैं जिन्हें CSIR-NEERI द्वारा विकसित विशेष फॉर्मूले से बनाया जाता है। ये सामान्य पटाखों की तुलना में कम आकार, कम ध्वनि और 30% तक कम हानिकारक गैसों व धूलकणों (PM2.5/PM10) का उत्सर्जन करते हैं।
Q2. CPCB को ग्रीन क्रैकर्स के नए फॉर्मूले पर क्या आपत्ति है?
उत्तर: CPCB को नए फॉर्मूले में ‘बेरियम नाइट्रेट’ (Barium Nitrate) के इस्तेमाल पर आपत्ति है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी खतरों के कारण बेरियम पर प्रतिबंध लगा रखा है।
Q3. फ्रेश टेस्टिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: CSIR-NEERI के प्रदूषण कम करने के दावों और CPCB की बेरियम संबंधी आपत्तियों के बीच विरोधाभास को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष निष्पक्ष वैज्ञानिक जांच का प्रस्ताव रखा गया है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध वैज्ञानिक रिपोर्टों, सार्वजनिक बयानों और न्यायालय की कार्यवाही के विवरणों पर आधारित है। अंतिम नियम और दिशा-निर्देश माननीय सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले और आधिकारिक सरकारी अधिसूचनाओं के अधीन होंगे।
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