लखनऊ. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब किसी रिपोर्ट या भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहा। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में इसके प्रभाव अब प्रत्यक्ष और चरम (Extreme) रूप में दिखने लगे हैं। IIT कानपुर के पर्यावरण और मौसम विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी शहरों में मौसम का पारंपरिक चक्र टूट चुका है, और कानपुर इसका प्रमुख उदाहरण बनता जा रहा है।
🌡️ 1. तापमान में चरम बदलाव: ठंड भी असामान्य, गर्मी भी आक्रामक
कानपुर में अब मौसम संतुलन की जगह ‘अचानक बदलाव’ ने ले ली है।
❄️ सर्दियों का नया पैटर्न
जनवरी 2026 में शहर ने कई वर्षों की तुलना में अधिक ठंड और लंबे समय तक कोहरा झेला। वहीं फरवरी की शुरुआत में ही तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग के कारण जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ में बदलाव से जोड़ रहे हैं।
🔥 अर्बन हीट आइलैंड का प्रभाव
तेजी से फैलता कंक्रीट, सड़कों-इमारतों की गर्म सतह और हरित क्षेत्रों की कमी ने कानपुर को ‘Urban Heat Island’ में बदल दिया है।
👉 शहर का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से 3°C से 5°C अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे लू (Heatwave) का खतरा हर साल पहले शुरू हो रहा है।
🌊 2. गंगा नदी और जल संकट: मात्रा भी प्रभावित, गुणवत्ता भी
जलवायु परिवर्तन का सीधा असर गंगा नदी और जल उपलब्धता पर पड़ा है।
🌧️ अनियमित मानसून
अब बारिश कम दिनों में बहुत तेज होती है।
- शहर में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात
- लेकिन गंगा का दीर्घकालिक जलस्तर स्थिर नहीं रह पाता
🚰 भूजल स्तर में लगातार गिरावट
बदलते वर्षा पैटर्न से Groundwater Recharge बाधित हो रहा है।
जाजमऊ, पनकी और औद्योगिक इलाकों में
👉 ट्यूबवेल और बोरिंग का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे जा चुका है।
⚠️ गंगा जल संधि 2026 की चिंता
2026 में भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि की अवधि समाप्त हो रही है।
जलवायु परिवर्तन के कारण घटता प्राकृतिक जल प्रवाह कानपुर जैसे शहरों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।
😷 3. वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य: AQI बना रोज़ का संकट
कानपुर पहले से ही देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है, और जलवायु परिवर्तन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
🌫️ ठहरी हुई हवा (Stagnant Air Effect)
सर्दियों में तापमान उलटाव (Temperature Inversion) और कम हवा की गति के कारण
PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक जमीन के पास जमा हो जाते हैं।
👉 औसतन AQI स्तर: 250–350 (Severe से Hazardous श्रेणी)
🏥 स्वास्थ्य पर असर
- अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में लगभग 20% की वृद्धि
- बच्चों और बुजुर्गों में सांस लेने की समस्याएँ
- गर्मी और नमी के कारण त्वचा रोग और एलर्जी के मामले बढ़े
🌾 4. खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव
कानपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र—बिठूर, घाटमपुर, शिवराजपुर—भी जलवायु अस्थिरता से अछूते नहीं हैं।
🌾 फसल चक्र बिगड़ा
समय से पहले बढ़ते तापमान के कारण
- गेहूं की फसल भराव से पहले ही सूखने लगी
- अनुमानित पैदावार नुकसान: 15–20%
🐛 कीटों का नया प्रकोप
तापमान और नमी में अस्थिरता से
- सब्जियों में नए प्रकार के कीट
- कीटनाशकों पर खर्च बढ़ा, लाभ घटा
कानपुर के लिए चेतावनी और अवसर दोनों
कानपुर में जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा।
यह पानी, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और जीवन-स्तर से जुड़ा संकट बन चुका है।
यदि समय रहते
✔ हरित क्षेत्र नहीं बढ़ाए गए
✔ औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती नहीं हुई
✔ जल प्रबंधन और शहरी योजना नहीं सुधरी
तो आने वाले वर्षों में कानपुर ‘Extreme Climate Impact City’ के रूप में जाना जा सकता है।
Matribhumisamachar


