लखनऊ | रविवार, 5 अप्रैल 2026
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने परिसर के भीतर स्थित अवैध धार्मिक ढांचों (मजारों) के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को जारी एक ताजा नोटिस के जरिए प्रशासन ने संबंधित मजार कमेटियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर इन ढांचों को हटा लें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद अवैध निर्माण को बलपूर्वक हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता और नोडल अधिकारी (भूमि अधिग्रहण) प्रोफेसर के.के. सिंह ने बताया कि यह कदम माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के उन आदेशों के अनुपालन में उठाया गया है, जो सार्वजनिक भूमि और सरकारी संस्थानों के भीतर किसी भी प्रकार के अवैध धार्मिक अतिक्रमण को प्रतिबंधित करते हैं। प्रशासन का तर्क है कि विश्वविद्यालय की भूमि केवल शैक्षणिक और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए आरक्षित है।
कुल 8 में से 3 मजारें पहले ही हटाई गईं
KGMU प्रशासन के अनुसार, सर्वे में कैंपस के भीतर कुल 8 मजारें चिन्हित की गई थीं। इनमें से 3 मजारों को पहले ही हटाया जा चुका है। वर्तमान में शेष 5 मजारें निम्नलिखित संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं:
-
माइक्रोबायोलॉजी विभाग (बिल्डिंग नंबर-2) के पीछे।
-
ट्रॉमा सेंटर परिसर।
-
नई ऑर्थोपेडिक बिल्डिंग के समीप।
-
रेस्पिरेटरी विभाग के आसपास।
लखनऊ की ताजा खबरें: matribhumisamachar.com/lucknow-news
जनवरी से चल रही है नोटिस की प्रक्रिया
यह विवाद नया नहीं है। इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2026 को हुई थी, जब पहला नोटिस जारी कर मजारों की वैधता और भूमि संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। इसके बाद:
-
26 फरवरी 2026 को दूसरा नोटिस भेजा गया।
-
रमजान और होली जैसे त्योहारों को देखते हुए कमेटियों को 4 अप्रैल 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया गया था।
-
प्रशासन का कहना है कि अधिकांश कमेटियों ने न तो संतोषजनक जवाब दिया और न ही रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी वैधता साबित करने वाले दस्तावेज पेश किए।
1947 से पहले का दावा और जांच
विवाद के बीच, एक मजार कमेटी ने दावा किया है कि उनका ढांचा 1947 (आजादी) से पहले का है और ऐतिहासिक महत्व रखता है। प्रशासन ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। यदि ऐतिहासिक प्रमाण सही पाए जाते हैं, तो उस पर विचार किया जाएगा, अन्यथा उसे भी अवैध श्रेणी में रखा जाएगा।
इस्लामिक संगठनों का विरोध
इस कार्रवाई पर राजनीतिक और धार्मिक रंग भी चढ़ने लगा है। All India Shia Personal Law Board के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा:
“ट्रैफिक और भीड़भाड़ का बहाना बनाकर प्राचीन मजारों को निशाना बनाना गलत है। हम इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हैं और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।”
वहीं, सुन्नी धर्मगुरुओं ने भी इसे ‘धार्मिक आस्था पर प्रहार’ करार दिया है।
आगे क्या?
अगले 15 दिन KGMU और लखनऊ प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने पर अडिग है, वहीं धार्मिक संगठन इसके विरोध में लामबंद हो रहे हैं। देखना होगा कि 18 अप्रैल के बाद प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई शुरू होती है या कोई बीच का रास्ता निकलता है।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
-
अंतिम तिथि: 18 अप्रैल 2026 तक हटाने का निर्देश।
-
आधार: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और अवैध अतिक्रमण।
-
असर: कैंपस में चिकित्सा सुविधाओं और मरीजों के आवागमन को सुगम बनाना।
Matribhumisamachar


