महेंद्रगढ़। शुक्रवार, 5 जून 2026
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में बन रहे देश के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक ‘इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब’ (IMLH) को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने नांगल चौधरी (नारनौल) क्षेत्र में बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर 7 सितंबर, 2026 तक के लिए स्थगन आदेश (Stay Order) जारी कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस परियोजना के लिए अधिग्रहित 1,000 एकड़ भूमि में से 129 एकड़ विवादित भूमि पर लागू होगा। इस फैसले के बाद प्रथम और द्वितीय चरण के कई महत्वपूर्ण कार्यों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है, जिससे इस प्रोजेक्ट को संभाल रही विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) प्रबंधन टीम में भारी निराशा है।
⚖️ क्या है पूरा मामला और क्यों मिला स्टे?
लॉजिस्टिक हब के लिए जमीन अधिग्रहण से प्रभावित नांगल चौधरी क्षेत्र के 91 किसानों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। किसानों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा और जमीन के अधिकार के नियमों के तहत न्याय नहीं मिला।
-
किसानों की पैरवी: इस मामले में किसानों की ओर से देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अजय अवस्थी, निशा तिवारी और आयुष उपाध्याय ने कोर्ट में अपना मजबूत पक्ष रखा।
-
सरकार का पक्ष: वहीं हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) बी.के. सतीजा, हिमांशु सतीजा, विवेक बेदी और समरविजय सिंह सहित वकीलों की बड़ी टीम ने पक्ष रखा।
दोनो पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने आगामी 7 सितंबर तक निर्माण कार्य रोकने के निर्देश जारी किए।
🏗️ प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति और टेंडर का गणित
यह प्रोजेक्ट ‘एनआईसीडीसी हरियाणा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब प्रोजेक्ट लिमिटेड’ नामक एक एसपीवी (SPV) द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की वित्तीय स्थिति और प्रगति को हम नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
| विकास का चरण (Phase) | कार्य का विवरण (Work Details) | कुल निवेश / लागत (Investment) | वर्तमान स्थिति (Current Status) |
| भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) | ~1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण (Bashirpur, Ghataser, Talot) | ₹150 करोड़ | पूरा हो चुका है (129 एकड़ पर अब विवाद) |
| प्रथम चरण (Phase 1) | रेल लाइन, प्लेटफॉर्म, बिजली, सड़क और पानी की पाइपलाइन | ₹200 करोड़ | कार्य पूरी तरह से संपन्न |
| द्वितीय चरण (Phase 2) | वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, स्क्रैप हैंडलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर | ₹800 करोड़ | 30 जून को ग्लोबल टेंडर जारी होना तय |
🎯 टेंडर प्रक्रिया
मूल रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून को करीब ₹800 करोड़ का पीपीपी (PPP) ओपन टेंडर छोड़ा जाना है। हालांकि, आधिकारिक तकनीकी निविदा (e-Tenders Haryana) के दस्तावेजों के अनुसार, इस मेगा प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव (DBFOT आधार पर) के लिए जारी किए गए ग्लोबल टेंडर की अंतिम तिथि और बिड ओपनिंग की प्रक्रियाएं जून-जुलाई 2026 के मध्य में ही निर्धारित हैं। इस बीच आए सुप्रीम कोर्ट के इस स्टे ऑर्डर से देश-विदेश की नामी कंपनियों की भागीदारी पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।
⚠️ कोर्ट का महत्वपूर्ण संरक्षण:
राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह आदेश राज्य सरकार को “भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013” के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने से नहीं रोकेगा। इसका मतलब है कि सरकार मुआवजे से जुड़े विवादों को आपसी सहमति या कानूनी दायरे में सुलझा सकती है।
📉 इस रोक से क्षेत्र को क्या नुकसान होगा?
नांगल चौधरी के इस ‘फ्रीट विलेज’ (Freight Village) को वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर (WDFC) से जोड़ा जा रहा है। एसपीवी के मैनेजर रवि कुमार के अनुसार, इस रोक से न केवल प्रबंधन निराश है बल्कि परियोजना में देरी होने से दक्षिण हरियाणा (Ahirwal Region) में पैदा होने वाले हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों में भी देरी होगी।
इस क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरने पर भी बैठे थे, और अब मामला कोर्ट में होने के कारण 7 सितंबर तक इस 129 एकड़ के मुख्य पैच पर कोई नया निर्माण नहीं हो पाएगा।
Matribhumisamachar


