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बरेली हिंसा के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा को बड़ा झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

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प्रयागराज । शुक्रवार, 5 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बरेली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में मुख्य साजिशकर्ता और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बहुत तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने बारादरी थाने में दर्ज मुकदमे को लेकर दाखिल की गई तौकीर रजा की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने इस मामले की गंभीरता और कानून-व्यवस्था के पहलुओं को देखते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।

वर्तमान में फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा ने बरेली की स्थानीय कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अपनी रिहाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, उच्च न्यायालय से भी राहत न मिलने के बाद अब उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसे मौलाना?

यह मामला पिछले वर्ष 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई भीषण हिंसा से जुड़ा हुआ है। ‘आई लव मोहम्मद’ (I Love Mohammad) अभियान के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान अचानक भीड़ उग्र हो गई थी, जिसके बाद जमकर पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। पुलिस प्रशासन की जांच में यह बात सामने आई थी कि इस हिंसा को भड़काने और भीड़ को उकसाने के पीछे मौलाना तौकीर रजा का मुख्य हाथ था।

बरेली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में त्वरित कार्रवाई की थी और मौलाना तौकीर रजा सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

थानों में दर्ज हैं कुल 10 मुकदमे, लगी हैं कई गंभीर धाराएं

बरेली हिंसा की भयावहता को देखते हुए यूपी पुलिस ने शहर के पांच प्रमुख थानों में केस दर्ज किए थे। इनमें बारादरी, कोतवाली, कैंट, किला और प्रेम नगर थाने शामिल हैं। मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ कुल 10 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें उन्हें नामजद आरोपी बनाया गया है।

हाईकोर्ट में जिस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, वह बारादरी थाने (कोतवाली में स्थानांतरित एफआईआर संख्या 1146/2025) से संबंधित थी। इस एफआईआर में मौलाना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद संगीन धाराएं और विशेष अधिनियम लगाए गए हैं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: पुलिस ने उनके खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के प्रयास, दंगा भड़काने और शांति भंग करने की नीयत से जुड़ी धाराएं— 121(1), 118(2), 109(1), 189(5), 195(1), 324(6), 324(5), 310(2), 61(2), 191(2), 196(1), 223, 191(3), 62, 196(2), और 109(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

  • विशेष अधिनियम (Special Acts): इसके अलावा सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 व 4 और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की धारा 7 भी लगाई गई है।

पुलिस की चार्जशीट और योगी सरकार का कड़ा रुख

योगी आदित्यनाथ सरकार इस मामले की शुरुआत से ही उपद्रवियों और अपराधियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाए हुए है। पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है, जिसमें तौकीर रजा को ही इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार दर्शाया गया है। प्रशासन ने मौलाना के करीबियों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन भी लिया है और कई संपत्तियों को सील किया जा चुका है।

हाईकोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज होने का सीधा मतलब यह है कि अदालत ने भी पुलिस के पास मौजूद सबूतों और आरोपों की गंभीरता को स्वीकार किया है। ऐसे में मौलाना तौकीर रजा को अभी लंबा वक्त सलाखों के पीछे ही गुजारना पड़ेगा।

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