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पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा: क्या चीन की बढ़ती दखल के बीच भारत बनेगा ‘नया गेमचेंजर’?

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पीएम मोदी और मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम हाथ मिलाते हुए

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7–8 फरवरी 2026 को मलेशिया की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह उनकी मलेशिया की तीसरी यात्रा है और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा मिलने के बाद पहली उच्च-स्तरीय यात्रा मानी जा रही है। इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में एक नए और निर्णायक चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यात्रा का उद्देश्य और रणनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और लोगों-से-लोगों के संबंधों को नई दिशा देना है। मलेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का एक अहम साझेदार है और यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति को और मजबूती देता है।

द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा

प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। चर्चा के मुख्य विषय होंगे:

  • व्यापार और निवेश में संतुलन
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
  • समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग
  • ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और सप्लाई-चेन साझेदारी

दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।

10वां भारत-मलेशिया CEO फोरम

इस यात्रा के दौरान 10वां भारत-मलेशिया CEO फोरम आयोजित किया जाएगा। इसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपति और कॉर्पोरेट नेता भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी मलेशियाई कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

भारतीय समुदाय से संवाद

मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां का तीसरा सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। प्रधानमंत्री मोदी का समुदाय को संबोधन भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। इस कार्यक्रम के जरिए शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहयोग को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग

मलेशिया, ASEAN क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

प्रमुख क्षेत्रीय सहयोग

  • व्यापार: 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 19.9 अरब डॉलर रहा। भारत व्यापार संतुलन सुधारने पर जोर देगा।
  • रक्षा: भारत द्वारा डोर्नियर विमान की संभावित बिक्री, Su-30 लड़ाकू विमानों के रखरखाव और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अपग्रेड पर चर्चा संभव है।
  • तकनीक: सेमीकंडक्टर सप्लाई-चेन, डिजिटल फिनटेक और साइबर सहयोग को प्राथमिकता।
  • डिजिटल भुगतान: UPI और मलेशिया के PayNet के बीच कनेक्टिविटी पर समझौते की संभावना।
  • शिक्षा: ‘तिरुवल्लुवर सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज’ की स्थापना और छात्रवृत्तियों के विस्तार पर विचार।

कूटनीतिक दृष्टि से क्यों अहम है यह दौरा?

  • यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति को ठोस आधार देती है।
  • मलेशिया के साथ मजबूत संबंध पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ाते हैं।
  • 2019-20 के दौरान आए कूटनीतिक तनाव के बाद यह दौरा आपसी विश्वास और सहयोग की वापसी का संकेत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा 2026 भारत-मलेशिया संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत यह दौरा व्यापार, रक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा और भारत की क्षेत्रीय भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

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