मुंबई | 2 अप्रैल, 2026
भारतीय कला के इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है जिसने वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ा दिया है। आधुनिक भारतीय चित्रकला के जनक माने जाने वाले राजा रवि वर्मा की कालजयी कृति ‘यशोदा और कृष्ण’ ने नीलामी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मुंबई में आयोजित Saffronart की ‘स्प्रिंग लाइव ऑक्शन’ में यह पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये ($18 मिलियन) में बिकी है।
⚡ 7 मिनट की ‘बिडिंग वॉर’ और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
बुधवार को हुई इस नीलामी में माहौल तब रोमांचक हो गया जब बोली लगाने वालों के बीच जबरदस्त होड़ मच गई। मात्र सात मिनट तक चली इस तेज बोली प्रक्रिया ने पेंटिंग की कीमत को उम्मीद से कहीं ऊपर पहुँचा दिया।
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पुराना रिकॉर्ड टूटा: इससे पहले सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग का खिताब एम. एफ. हुसैन की कृति ‘ग्राम यात्रा’ के नाम था, जो पिछले साल 118 करोड़ रुपये में बिकी थी।
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अनुमान से अधिक कीमत: विशेषज्ञों ने इस पेंटिंग की कीमत 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन अंतिम बोली ने सबको हैरान कर दिया।
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👑 साइरस पूनावाला बने इस ‘अनमोल रत्न’ के संरक्षक
इस ऐतिहासिक पेंटिंग को ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (SII) के संस्थापक और दिग्गज उद्योगपति डॉ. साइरस एस. पूनावाला ने खरीदा है। पेंटिंग खरीदने के बाद उन्होंने इसे केवल एक निजी संग्रह का हिस्सा न मानकर एक “राष्ट्रीय धरोहर” बताया।
“मुझे इस प्रतिष्ठित कृति को सहेजने का सौभाग्य मिला है। यह पेंटिंग सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि देश की भावी पीढ़ियां राजा रवि वर्मा की इस जादुई कला को करीब से देख सकें।”
— डॉ. साइरस पूनावाला
🖼️ क्यों खास है ‘यशोदा और कृष्ण’?
1890 के दशक में अपनी कला के चरम पर रहे राजा रवि वर्मा ने इस ऑयल पेंटिंग (Oil on Canvas) को तैयार किया था। इसकी कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे भारतीय कला की ‘मोनालिसा’ बनाती हैं:
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भावुक प्रसंग: यह पेंटिंग भागवत पुराण के एक अत्यंत संवेदनशील क्षण को दर्शाती है, जहाँ माता यशोदा गाय दुह रही हैं और बाल कृष्ण पीछे से स्नेहपूर्वक दूध के पात्र की ओर हाथ बढ़ा रहे हैं।
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यूरोपीय शैली और भारतीय आत्मा: रवि वर्मा ने यूरोपीय यथार्थवाद (European Realism) की तकनीक का उपयोग कर भारतीय पौराणिक कथाओं को जीवंत किया।
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प्रकाश और छाया (Chiaroscuro): पेंटिंग में रंगों का चयन और प्रकाश का प्रभाव इसे इतना वास्तविक बनाता है कि देखने वाले को यह किसी स्थिर तस्वीर के बजाय एक सजीव दृश्य जैसा प्रतीत होता है।
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दुर्लभता: राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स को भारत में ‘नेशनल ट्रेजर’ (National Treasure) घोषित किया गया है, जिसका अर्थ है कि इन्हें देश की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जा सकता।
📊 भारतीय कला बाजार का बदलता स्वरूप
कला विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीलामी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय मास्टर आर्टिस्ट्स की वैश्विक वैल्यू अब पश्चिम के दिग्गज कलाकारों के बराबर पहुँच रही है। Saffronart की सह-संस्थापक मीनल वज़ीरानी के अनुसार, “यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि भारतीय कला की सांस्कृतिक और भावनात्मक गहराई पर दुनिया की मुहर है।”
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