तेहरान. मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष अब एक निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी यह युद्ध आज अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। पिछले 24 घंटों की घटनाओं ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आहट से डरा दिया है। जहाँ एक ओर इजरायली वायुसेना ने ईरान के भीतर घुसकर कोहराम मचाया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को झुकने के लिए अंतिम चेतावनी दे दी है।
🔴 ट्रंप का अल्टीमेटम: “झुको या परिणाम भुगतो”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध में अपनी रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” (Unconditional Surrender) की मांग की है। व्हाइट हाउस से जारी बयान में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान विनाश रोकना चाहता है, तो उसे अपने सभी परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों को तुरंत बंद करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब केवल युद्ध विराम नहीं, बल्कि ईरान में ‘नेतृत्व परिवर्तन’ (Regime Change) की पटकथा लिख रहा है।
🚀 इजरायल की ‘ऑपरेशन थंडर’: 400 ठिकानों पर बमबारी
पिछले 24 घंटों में इजरायली वायुसेना (IAF) ने ईरान के सैन्य ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।
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निशाने पर तेहरान: राजधानी तेहरान में राष्ट्रपति भवन और सर्वोच्च नेतृत्व के परिसरों के पास जोरदार धमाके सुने गए हैं।
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सैन्य क्षमता पर चोट: 400 से अधिक ठिकानों में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर, भूमिगत ड्रोन गोदाम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल हैं।
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नुकसान का आकलन: अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की मिसाइल मारक क्षमता में 23% और ड्रोन हमलों में 73% तक की भारी कमी आई है। दावा है कि ईरान का 60-64% ड्रोन स्टॉक अब मलबे में तब्दील हो चुका है।
🌍 क्षेत्रीय युद्ध की आग: लेबनान, इराक और खाड़ी देश
यह युद्ध अब केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है:
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लेबनान: इजरायल ने हिजबुल्लाह के 500 ठिकानों को निशाना बनाया है। दक्षिणी लेबनान पूरी तरह युद्ध का मैदान बन चुका है।
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इराक: कुर्दिस्तान की राजधानी एरबिल में एक होटल पर ड्रोन हमला हुआ है, जिससे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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खाड़ी देशों पर खतरा: ईरान ने यूएई (UAE), कतर और बहरीन में अमेरिकी अड्डों पर हमले की कोशिश की, जिसे ‘मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ ने नाकाम कर दिया।
☢️ परमाणु खतरा और पर्यावरणीय चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दुनिया को आगाह किया है कि यदि ईरान के परमाणु केंद्रों (जैसे बुशहर या नतांज) को नुकसान पहुंचता है, तो यह रेडियोधर्मी रिसाव का कारण बन सकता है। यह न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य-पूर्व के लिए एक स्थायी पर्यावरणीय आपदा होगी।
⛽ ग्लोबल मार्केट में कोहराम: $90 के पार पहुंचा कच्चा तेल
युद्ध की आग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
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कच्चा तेल (Crude Oil): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं।
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कतर की चेतावनी: दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों में से एक कतर ने कहा है कि यदि युद्ध जारी रहा, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) कुछ ही हफ्तों में ठप हो जाएगी।
🇮🇳 भारत की कूटनीति: ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर बड़ा अपडेट
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस संकट के बीच मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने ईरान के उप विदेश मंत्री से मुलाकात की।
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राहत की खबर: ईरान ने भारत को आश्वासन दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहेगा।
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रणनीतिक तनाव: हालांकि, अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए इस मार्ग को बंद करने की ईरान की धमकी ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
🔍 निष्कर्ष और विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 48 घंटों में कोई प्रभावी कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक ‘पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध’ (Full-scale Regional War) में बदल जाएगा। ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता भले ही कम हुई हो, लेकिन उसकी ‘सरप्राइज अटैक’ की नीति अभी भी एक बड़ा खतरा है।
आगे क्या होगा?
क्या ईरान ट्रंप की मांग के आगे घुटने टेकेगा? या यह संघर्ष परमाणु आपदा की ओर बढ़ेगा? दुनिया की नजरें अब संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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