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तमिलनाडु में ‘थलापति’ युग का उदय: विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात, सरकार बनाने का दावा पेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई । बुधवार, 6 मई 2026 

तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति का तिलिस्म टूटता नजर आ रहा है। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख और अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने बुधवार को राजभवन में राज्यपाल आर.एन. रवि (नोट: नवीनतम अपडेट के अनुसार राजेंद्र अर्लेकर) से मुलाकात की और राज्य में अगली सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। 2026 के विधानसभा चुनावों में TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।

चुनावी गणित: बहुमत से महज 10 कदम दूर

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। TVK ने अपने दम पर 108 सीटें जीती हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें सरकार चलाने के लिए अभी भी 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

पार्टी सीटें (2026 चुनाव)
TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) 108
DMK (द्रमुक) 59
AIADMK (अन्नाद्रमुक) 47
कांग्रेस 05
अन्य (PMK, VCK, वामपंथी) 15

संभावित गठबंधन और राजनीतिक समीकरण

सूत्रों के अनुसार, विजय ‘प्लान बी’ पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस ने पहले ही संकेत दिया है कि वे TVK को समर्थन दे सकते हैं। यदि कांग्रेस के 5 विधायक विजय के साथ आते हैं, तब भी उन्हें 5 और विधायकों की आवश्यकता होगी। ऐसे में PMK (पट्टाली मक्कल कची) और कुछ निर्दलीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालाँकि, DMK के पुराने सहयोगी दल जैसे VCK और MDMK ने फिलहाल TVK से दूरी बनाए रखी है, जिससे मुकाबला काफी रोचक हो गया है।

विजय की व्यक्तिगत जीत और सिनेमा से विदाई

विजय ने खुद दो निर्वाचन क्षेत्रों—तिरुचिरापल्ली पूर्व और पेरम्बूर—से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगहों पर भारी मतों से जीत दर्ज की। दिसंबर 2025 में अभिनय छोड़ने के उनके फैसले को जनता ने पूर्ण समर्थन दिया है, जिससे यह साबित हो गया है कि उनका आधार केवल सिनेमा तक सीमित नहीं है।

शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी

यदि राज्यपाल विजय के दावे को स्वीकार कर लेते हैं, तो 7 मई, 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और चेन्नई की सड़कों पर “थलापति” के पोस्टर लगे हुए हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।