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WhatsApp Username Feature पर भारत सरकार का कड़ा रुख; साइबर फ्रॉड के खतरे के बीच रोलआउट पर लगी रोक

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नई दिल्ली । सोमवार, 6 जुलाई 2026

मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (WhatsApp) को भारत सरकार की ओर से बड़ा झटका लगा है। फोन नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देने वाले व्हाट्सएप के आगामी और बेहद विवादित WhatsApp Username Feature के रोलआउट पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिस का जवाब देने के लिए व्हाट्सएप ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए सरकार ने कंपनी को तीन दिन की और मोहलत दे दी है। इसके साथ ही कंपनी ने सरकार को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि जब तक इस संवेदनशील मामले पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह भारत में इस फीचर को आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं करेगी।

क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद?

दरअसल, पिछले बुधवार (1 जुलाई 2026) को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा को एक कड़ा नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में व्हाट्सएप पर प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर की सुरक्षा और इससे जुड़े संभावित खतरों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि जब तक इस मुद्दे पर ‘सरकार की संतुष्टि के अनुसार’ विस्तृत बातचीत और समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर के रोलआउट को पूरी तरह से थाम दिया जाए।

नोटिस मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले शुक्रवार को मेटा की एक उच्च स्तरीय टीम ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा।

सरकार को किन बातों की है चिंता?

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा किए गए आंतरिक जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) में इस फीचर को लेकर कई रेड फ्लैग्स दिखाए गए हैं। सरकार को मुख्य रूप से निम्नलिखित चिंताएं हैं:

  1. ऑनलाइन धोखाधड़ी और फिशिंग में बढ़ोतरी: सरकार का मानना है कि बिना मोबाइल नंबर दिखाए सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट शुरू होने से online fraud and digital arrest scams on whatsapp के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो सकती है।

  2. डिजिटल अरेस्ट और फेक आईडी का खतरा: साइबर अपराधी किसी प्रतिष्ठित अधिकारी, सरकारी एजेंसी, या वित्तीय संस्थान (जैसे बैंक) से मिलते-जुलते यूजरनेम (Lookalike Usernames) बनाकर आम यूज़र्स को आसानी से झांसे में ले सकते हैं।

  3. पहचान छुपाना हुआ आसान: अब तक व्हाट्सएप पर किसी भी नए नंबर से मैसेज आने पर यूजर की पहचान (सीआईएम कार्ड के जरिए) ट्रैक करना आसान होता था, लेकिन यूजरनेम आने के बाद अपराधियों को अपनी पहचान छुपाने का एक नया जरिया मिल सकता है।

आईटी एक्ट (IT Act) और नियमों का हवाला

केंद्र सरकार ने नोटिस में मेटा को सख्त लहजे में याद दिलाया है कि वह आईटी एक्ट और आईटी नियम, 2021 (IT Rules, 2021) के तहत एक ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ’ (Significant Social Media Intermediary) है। इस नाते कंपनी उचित सावधानी बरतने (Due Diligence Obligations) की कानूनी बाध्यताओं से बंधी हुई है। सरकार ने पूछा है कि साइबर अपराधों को बढ़ावा देने की आशंका वाले इस नए फीचर के लिए कंपनी पर आईटी एक्ट की धाराओं (जैसे धारा 66C, 66D और धारा 79) के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

व्हाट्सएप (Meta) का पक्ष और सुरक्षा के दावे

सरकार के कड़े रुख के बाद व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह फीचर अभी लाइव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसे इस वर्ष के अंत तक धीरे-धीरे (Phased Manner) रोलआउट करने की योजना बनाई थी। सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाट्सएप ने निम्नलिखित सुरक्षा परतों (Layers of Defense) का दावा किया है:

  • हाई-प्रोफाइल नाम रिजर्व्ड: मेटा ने बताया कि किसी भी प्रकार के प्रतिरूपण (Impersonation) को रोकने के लिए सरकारी विभागों, मशहूर हस्तियों, राजनेताओं और वेरिफाइड खातों के नामों को पहले से ही ‘होल्ड’ कर दिया गया है, ताकि कोई गलत व्यक्ति उन नामों से यूजरनेम न बना सके।

  • यूजरनेम की (Username Key): किसी अनजान व्यक्ति को आपसे चैट करने के लिए आपका सटीक यूजरनेम पता होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही इसमें एक वैकल्पिक ‘यूजरनेम की’ का फीचर भी जोड़ा जाएगा।

  • एंटी-एब्यूज सिस्टम: यदि कोई अकाउंट बार-बार अलग-अलग यूजरनेम गेस करने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उसे ब्लॉक कर देगा। साथ ही पहली बार मैसेज आने पर यूजर को यह भी दिखेगा कि सामने वाला अकाउंट नया है या किसी दूसरे देश के नंबर से संचालित हो रहा है।

पेटीएम (Paytm) और मोबिक्विक (MobiKwik) जैसी बड़ी भारतीय फिनटेक कंपनियों के संस्थापकों ने भी सोशल मीडिया पर इस फीचर को लेकर चिंता जताई थी कि यह वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा जरिया बन सकता है। फिलहाल, भारत में व्हाट्सएप के 50 करोड़ से अधिक यूजर्स की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सरकार इस विषय पर कोई भी ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है।

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