नई दिल्ली | बुधवार, 29 जुलाई 2026
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में ‘द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने जहां देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधलियों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा, वहीं सरकार ने कड़े नियमों का हवाला देकर भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की अपनी प्रतिबद्धता जताई।
गर्मा-गर्म बहस के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिसके तुरंत बाद हुए भारी हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को अगले दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।
राहुल-प्रियंका का आक्रामक रुख और सरकार का जवाब
विपक्ष की ओर से कांग्रेस ने मोर्चा संभाला, जहाँ शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए गए:
-
प्रियंका गांधी की टिप्पणी: प्रियंका गांधी ने सदन के भीतर शिक्षा मंत्री पर तीखी टिप्पणी की, जिसे बाद में पीठ द्वारा सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया। हालांकि, प्रियंका ने स्पष्ट किया है कि वे अपने बयान को ऑथेंटिकेट (सत्यापित) करेंगी।
-
राहुल गांधी की घेराबंदी: राहुल गांधी ने सदन के बाहर शिक्षा मंत्री को निशाने पर लिया।
-
किरेन रिजिजू का पलटवार: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के इस रुख की कड़ी निंदा करते हुए इसे सीधा “चरित्र हनन” की कोशिश करार दिया।
-
जितेंद्र सिंह का हमला: सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अन्य विपक्षी दलों के तेवर
-
असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM): उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया और इसकी तुलना पड़ोसी देशों बांग्लादेश व नेपाल में हुए छात्र आंदोलनों से कर दी।
-
अखिलेश यादव (सपा): सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर चुटीले तंज कसते हुए प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने का आरोप लगाया।
एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल 2026: क्या-क्या बदले नियम?
2024 के मूल कानून में और अधिक सख्ती लाते हुए 2026 के इस संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माने की सीमाओं को काफी बढ़ा दिया गया है।
| अपराध का प्रकार | पुराने नियम (2024 एक्ट) | नए संशोधन नियम (2026 बिल) |
| व्यक्तिगत अनुचित साधन (Unfair Means) | 3 से 5 साल की जेल, ₹10 लाख तक जुर्माना | 5 से 10 साल की जेल, ₹50 लाख तक जुर्माना |
| सर्विस प्रोवाइडेड (एजेंसी) की संलिप्तता | ₹1 करोड़ तक जुर्माना, 4 साल का बैन | ₹5 करोड़ तक जुर्माना, 8 साल का बैन |
| सर्विस प्रोवाइडर के वरिष्ठ अधिकारी/निदेशक | 3 से 10 साल जेल, ₹1 करोड़ जुर्माना | 5 से 10 साल जेल, ₹5 करोड़ तक जुर्माना |
| संगठित पेपर लीक गिरोह (Organised Crime) | 5 से 10 साल जेल, ₹1 करोड़ जुर्माना | 7 से 10 साल जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना |
त्वरित न्याय के लिए नए प्रावधान
-
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी।
-
समयबद्ध जांच: चार्जशीट दाखिल होने के बाद जांच 2 महीने के भीतर पूरी की जाएगी और केस का ट्रायल 3 महीने के भीतर संपन्न होगा।
-
विशेष टास्क फोर्स (STF): संगठित अपराधों से निपटने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
उत्तर: यह कानून यूपीएससी, एसएससी, रेलवे और एनटीए जैसी केंद्रीय संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और चीटिंग को रोकने के लिए सजा और जुर्माने को कड़ा करने हेतु लाया गया है।
Q2. इस नए कानून में पेपर लीक कराने वालों को कितनी सजा होगी?
उत्तर: संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले माफिया और गिरोह को 7 से 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है।
Q3. क्या परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों/छात्रों को भी इस कानून के तहत जेल होगी?
उत्तर: नहीं, सामान्य अभ्यर्थियों को इस कड़े कानून की आपराधिक धाराओं से बाहर रखा गया है; उनके खिलाफ परीक्षा एजेंसियों के अपने प्रशासनिक नियम ही लागू रहेंगे। यह कानून मुख्य रूप से पेपर लीक कराने वाले रैकेट, कोचिंग संस्थानों और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों/सर्विस प्रोवाइडरों पर नकेल कसता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण: यह लेख संसद भवन में हुई कार्यवाहियों, बयानों और आधिकारिक समाचार स्रोतों/प्रेस विज्ञप्तियों के आधार पर जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानून से जुड़े अंतिम प्रावधान राजपत्र (Gazette) अधिसूचना के अनुसार मान्य होंगे।
Matribhumisamachar


