देहरादून । रविवार, 6 सितंबर 2026
उत्तराखंड राज्य में निर्धारित शैक्षणिक मानकों एवं अनिवार्य मान्यता नियमों का अनुपालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में देहरादून और हल्द्वानी में हाल ही में 5 और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही राज्य भर में अब तक कुल 20 मदरसों का संचालन पूरी तरह बंद कराया जा चुका है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
देहरादून और हल्द्वानी में हुई हालिया कार्रवाई का विवरण
अल्पसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर ढकाते के अनुसार, शनिवार को प्रशासनिक टीमों ने राज्य के दो मुख्य शहरों में कार्रवाई को अंजाम दिया:
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देहरादून:
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आजाद कॉलोनी स्थित ‘मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया’ को मान्यता संबंधी दस्तावेज पेश न कर पाने पर प्रशासन द्वारा मौके पर सील कर दिया गया।
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माजरा स्थित ‘मदरसा दार-ए-अरकम’ और ‘मदरसा दारुल उलूम रहीमिया’ के प्रबंधन ने आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण स्वेच्छा से संचालन बंद करने का लिखित शपथ-पत्र जमा कराया।
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हल्द्वानी (नैनीताल):
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शनि बाजार रोड (गौजाजाली उत्तर) स्थित ‘मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना’ को सील किया गया।
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इंदिरा नगर (बनभूलपुरा) में संचालित एक अन्य गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई।
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हल्द्वानी के सिटी मजिस्ट्रेट ए. बी. वाजपेयी ने स्पष्ट किया कि संस्थानों के प्रबंधकों को अपने पंजीकरण व शैक्षणिक अभिलेख प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दिया गया था। निर्धारित समयावधि में दस्तावेज न मिलने पर नियमानुसार सीलिंग की गई।
20 मदरसों पर अब तक का कुल आंकड़ा
राज्य प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक कार्रवाई का विवरण निम्नवत है:
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कुल बंद/प्रभावित संस्थान: 20
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प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसे: 17
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प्रबंधन द्वारा स्वयं लिखित रूप से बंद किए गए मदरसे: 3
सख्त नियम और नए शैक्षणिक सुधार
उत्तराखंड में ‘मदरसा बोर्ड’ की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के तहत नया ढांचा लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी) के बच्चों को मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा (जैसे गणित, विज्ञान, कंप्यूटर) से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि “राज्य में किसी भी शिक्षण संस्थान को निर्धारित नियमों और मान्यता संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन किए बिना चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: कार्रवाई का मुख्य आधार संस्थानों के पास वैध सरकारी मान्यता (Recognition) का न होना और शासन द्वारा निर्धारित शैक्षणिक व सुरक्षा मानकों का अनुपालन न करना है।
Q2: अब तक राज्य में कुल कितने मदरसे सील या बंद किए जा चुके हैं?
उत्तर: अब तक कुल 20 मदरसों पर कार्रवाई हुई है, जिनमें 17 को प्रशासन ने सील किया है तथा 3 के प्रबंधन ने स्वयं संचालन बंद करने की लिखित सहमति दी है।
Q3: क्या सरकार वैध और मान्यता प्राप्त मदरसों पर भी रोक लगा रही है?
उत्तर: नहीं, यह कार्रवाई केवल गैर-कानूनी और बिना मान्यता के चल रहे संस्थानों पर हो रही है। जिन संस्थानों ने सभी 22 आवश्यक मानक पूरे किए हैं, उन्हें अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान की मान्यता दी जा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों, प्रशासनिक बयानों और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जनसामान्य को शैक्षणिक सुधारों और प्रशासनिक कार्रवाई से अवगत कराना है।
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