श्रीहरिकोटा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) वर्ष 2026 की शानदार शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसरो आगामी 12 जनवरी को अपने भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 (Earth Observation Satellite-N1) को लॉन्च करेगा। यह इस साल का भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन होगा।
मिशन की मुख्य विशेषताएँ
यह मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यहाँ इस मिशन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें दी गई हैं:
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सटीक इमेजिंग: EOS-N1 अत्याधुनिक पेलोड से लैस है, जो उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें भेजने में सक्षम है।
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निगरानी क्षमता: यह उपग्रह कृषि, वानिकी, भू-विज्ञान और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
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स्वदेशी तकनीक: इस मिशन में इस्तेमाल किए गए अधिकांश उपकरण और तकनीक पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित किए गए हैं।
क्यों खास है यह मिशन?
नए साल का यह पहला मिशन न केवल इसरो के वैज्ञानिकों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे गगनयान और चंद्रयान के अगले चरण) के लिए एक मज़बूत आधार भी तैयार करेगा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
“हमारा लक्ष्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने और देश की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए करना है।” — इसरो प्रवक्ता
लॉंच का विवरण
| विवरण | जानकारी |
| लॉन्च की तारीख | 12 जनवरी, 2026 |
| उपग्रह का नाम | EOS-N1 |
| लॉन्च पैड | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| मिशन का उद्देश्य | पृथ्वी अवलोकन और डेटा संग्रहण |
EOS-N1 मिशन के मुख्य तकनीकी पहलू
उन्नत सेंसर (Advanced Sensors): EOS-N1 में मल्टी-स्पेक्ट्रल और पैनक्रोमैटिक पेलोड लगे हैं। यह इसे दिन और रात दोनों समय, साथ ही खराब मौसम में भी स्पष्ट तस्वीरें लेने की क्षमता प्रदान करते हैं।
ऑर्बिट (कक्षा): इस उपग्रह को ‘सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट’ (SSO) में स्थापित किया जाएगा, जो लगभग 500-600 किमी की ऊँचाई पर होगी। यह कक्षा पृथ्वी के अवलोकन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
डेटा ट्रांसमिशन: इसमें हाई-स्पीड डेटा हैंडलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह बहुत ही कम समय में बड़ी मात्रा में डेटा इसरो के ग्राउंड स्टेशनों को भेज सकता है।
जीवनकाल: इस उपग्रह का मिशन जीवन लगभग 5 से 7 वर्ष होने का अनुमान है, जिसके दौरान यह निरंतर देश की सीमाओं और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी करेगा।
यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
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कृषि: किसानों को मिट्टी की नमी और फसलों की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी।
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आपदा प्रबंधन: बाढ़, चक्रवात या भूकंप जैसी स्थितियों में यह उपग्रह तुरंत राहत और बचाव कार्यों के लिए नक्शे प्रदान करेगा।
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सुरक्षा: सीमाओं पर होने वाली किसी भी हलचल पर पैनी नज़र रखने में भारतीय सेना को इससे बड़ी मदद मिलेगी।
कहाँ देख सकते हैं लाइव (Platform Details)
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ISRO की आधिकारिक वेबसाइट: isro.gov.in पर जाकर आप सीधे वेबकास्ट देख सकते हैं।
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YouTube: इसरो के आधिकारिक यूट्यूब चैनल (ISRO Official) पर हाई-डेफिनिशन लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध होगी।
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Facebook/X (Twitter): इसरो के सोशल मीडिया हैंडल्स पर पल-पल की अपडेट और लाइव लिंक साझा किए जाएंगे।
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Doordarshan: ‘दूरदर्शन नेशनल’ चैनल पर लॉन्च का विशेष कवरेज और वैज्ञानिकों के साथ चर्चा का प्रसारण किया जाता है।
क्या होगा लाइव कवरेज में खास?
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प्री-लॉंच शो: लॉन्च से लगभग 30-45 मिनट पहले विशेषज्ञों के साथ चर्चा शुरू होगी, जिसमें मिशन के लक्ष्यों को समझाया जाएगा।
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मल्टी-कैमरा व्यू: श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से रॉकेट के उठने के अलग-अलग एंगल्स दिखाए जाएंगे।
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कंट्रोल रूम की हलचल: मिशन कंट्रोल सेंटर (MCC) के अंदर वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया और रॉकेट की गति का ग्राफिकल डेटा भी स्क्रीन पर दिखेगा।
क्या आप श्रीहरिकोटा जाकर देखना चाहते हैं?
यदि आप इस लॉन्च को अपनी आँखों से देखना चाहते हैं, तो इसरो की ‘Launch View Gallery’ में जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए इसरो की ‘SDSC SHAR’ वेबसाइट पर पंजीकरण लिंक लॉन्च से कुछ दिन पहले खोला जाता है।
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) की ‘लॉन्च व्यू गैलरी’ से रॉकेट लॉन्च देखना एक अविस्मरणीय अनुभव है। 12 जनवरी को होने वाले PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया काफी सरल है, लेकिन सीटें सीमित होने के कारण आपको जल्दी करनी होगी।
पंजीकरण प्रक्रिया:
पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (Keep these ready)
पंजीकरण शुरू करने से पहले निम्नलिखित विवरण अपने पास रखें:
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आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, या कोई भी सरकारी फोटो पहचान पत्र।
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सक्रिय मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी।
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साथ जाने वाले अन्य सदस्यों (यदि कोई हो) के नाम, उम्र और उनके पहचान पत्र का विवरण।
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आगंतुक का फोटो (स्कैन किया हुआ)।
पंजीकरण कैसे करें (Step-by-Step Process)
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आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले इसरो की आधिकारिक पंजीकरण वेबसाइट lvg.shar.gov.in पर जाएं।
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ईमेल वेरिफिकेशन: अपना ईमेल आईडी दर्ज करें। आपके ईमेल पर एक वेरिफिकेशन लिंक भेजा जाएगा। उस लिंक पर क्लिक करके आगे बढ़ें।
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विवरण भरें: अपना नाम, उम्र, लिंग और पता जैसी जानकारी दर्ज करें।
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पहचान पत्र अपलोड करें: अपने सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार) का नंबर भरें और उसकी फोटो अपलोड करें।
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सदस्यों को जोड़ें: यदि आप परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं, तो ‘Add Member’ विकल्प का उपयोग करें (एक बार में अधिकतम सीमा होती है, आमतौर पर 5-10 लोग)।
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पंजीकरण सबमिट करें: सभी जानकारी जाँचने के बाद ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।
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पास डाउनलोड करें: पंजीकरण सफल होने के बाद, आपको एक ‘Visitor Pass’ प्राप्त होगा। इसका प्रिंटआउट ले लें, क्योंकि प्रवेश के समय इसे और मूल पहचान पत्र को दिखाना अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
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समय सीमा: पंजीकरण आमतौर पर लॉन्च से 4-5 दिन पहले शुरू होता है और सीटें भरते ही बंद हो जाता है। 12 जनवरी के लॉन्च के लिए आप 7 से 10 जनवरी के बीच वेबसाइट चेक करते रहें।
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पहुंचने का समय: लॉन्च के समय से कम से कम 2-3 घंटे पहले श्रीहरिकोटा पहुंचना उचित होता है ताकि सुरक्षा जांच समय पर हो सके।
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नि:शुल्क सेवा: ध्यान रखें कि यह पंजीकरण पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) है। इसरो इसके लिए कोई शुल्क नहीं लेता।
क्या होगा अगर आप वहां नहीं जा पाते?
यदि आपको सीट नहीं मिल पाती है, तो घबराएं नहीं! श्रीहरिकोटा के पास पुलीकट झील (Pulicat Lake) के किनारे से भी रॉकेट की उड़ान को बहुत स्पष्ट देखा जा सकता है।
Matribhumisamachar


