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तुर्कमान गेट हिंसा: पत्थरबाजी मामले में अब तक 10 गिरफ्तार, 15 अन्य की पहचान

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नई दिल्ली. तुर्कमान गेट स्थित  के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। नवीनतम जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां की हैं और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है। बुधवार (7 जनवरी) तड़के नगर निगम (MCD) की कार्रवाई के दौरान भड़की हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर मस्जिद से सटे 0.195 एकड़ से अधिक भूमि पर बने अवैध निर्माण (बारात घर और क्लिनिक) को हटाने के दौरान भीड़ ने पुलिस और बुलडोजर पर पथराव किया था।

प्रमुख घटनाक्रम और गिरफ्तारियां

मौके पर गिरफ्तारियां: पुलिस ने हिंसा के तुरंत बाद 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनकी पहचान मोहम्मद कासिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, मोहम्मद अदनान और सनील के रूप में हुई है।

कुल हिरासत: ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अब तक हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 10 तक पहुंच गई है।

CCTV और बॉडीकैम से पहचान: दिल्ली पुलिस ने बॉडी-वॉर्म कैमरों (Body-worn cameras) और स्थानीय सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 15 अन्य उपद्रवियों की पहचान की है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

ज्वाइंट सीपी (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा के अनुसार, पुलिस ने ‘न्यूनतम बल’ का प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना में थाना प्रभारी (SHO) समेत 5 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:

कार्रवाई केवल अवैध व्यावसायिक ढांचों पर थी, मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है।

अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स की जांच की जा रही है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 121, 132, 191 (दंगा) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

तनाव के बीच शांति की अपील

इलाके में भारी सुरक्षा बल और RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) तैनात है। दिल्ली के गृह मंत्री और पुलिस प्रशासन ने स्थानीय ‘अमन कमेटी’ के साथ बैठक कर शांति बनाए रखने की अपील की है। मस्जिद कमेटी ने भी स्पष्ट किया है कि उन्हें अवैध निर्माण हटाने से आपत्ति नहीं थी, लेकिन वे कब्रिस्तान की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।

दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

कोर्ट के आदेश और कानूनी पृष्ठभूमि

अतिक्रमण हटाने का मूल आदेश (12 नवंबर 2025):

दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने 12 नवंबर 2025 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए एमसीडी (MCD) और पीडब्ल्यूडी (PWD) को आदेश दिया था। कोर्ट ने रामलीला मैदान और तुर्कमान गेट के पास लगभग 38,940 वर्ग फुट भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों को 3 महीने का समय दिया था। यह याचिका ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नामक संस्था द्वारा दायर की गई थी।

एमसीडी का निर्णय (22 दिसंबर 2025):

हाईकोर्ट के निर्देशानुसार किए गए सर्वे के बाद, एमसीडी ने 22 दिसंबर 2025 को आदेश जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि मस्जिद के पास केवल 0.195 एकड़ (लगभग 934 वर्ग गज) भूमि ही वैध पट्टे (Lease) पर है। इसके अतिरिक्त जो भी निर्माण (जैसे बारात घर, क्लिनिक, दुकानें) हैं, वे अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए।

ताजा सुनवाई और कोर्ट का रुख (6 जनवरी 2026):

मस्जिद की प्रबंधन समिति ने एमसीडी के विध्वंस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 6 जनवरी 2026 को (विध्वंस से महज कुछ घंटे पहले), न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।

कोई अंतरिम रोक नहीं: कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कोई स्टे (रोक) लगाने से इनकार कर दिया

    • नोटिस जारी: कोर्ट ने शहरी विकास मंत्रालय, एमसीडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

    • अगली सुनवाई: इस मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 22 अप्रैल 2026 की तारीख तय की गई है।

विवाद का मुख्य बिंदु

प्रबंधन समिति का पक्ष: समिति का तर्क है कि विवादित भूमि ‘वक्फ संपत्ति’ है और इस पर किसी भी विवाद का निपटारा ‘वक्फ ट्रिब्यूनल’ को करना चाहिए, न कि एमसीडी को। वे विशेष रूप से मस्जिद से सटे कब्रिस्तान को बचाने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष: एमसीडी और एलएंडडीओ (L&DO) का कहना है कि 1940 के मूल पट्टे के अनुसार मस्जिद के पास केवल 0.195 एकड़ जमीन है। इसके बाहर बने ‘बारात घर’ और ‘डिस्पेंसरी’ सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग हैं।

सुरक्षा का पहलू

कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुरक्षा एजेंसियां इस इलाके को लेकर संवेदनशील हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए विस्फोट का संदिग्ध (उमर उन नबी) घटना से पहले इस मस्जिद में रुका था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अधिक सतर्क है।

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