नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को टेरर फंडिंग मामले में आरोपी कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सुनवाई 13 जनवरी तक के लिए टाल दी है। अदालत ने समय की कमी और कुछ व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस मामले को अगले सप्ताह सुनने का निर्णय लिया।
आज की सुनवाई की मुख्य बातें
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पीठ: यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष आया।
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अदालत की टिप्पणी: बेंच ने कहा कि आज समय सीमित होने के कारण मामले पर विस्तार से सुनवाई संभव नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की, “हम आज कुछ कठिनाई में हैं क्योंकि हमारे पास समय कम है।”
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पक्ष: शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस पेश हुए, जबकि एनआईए (NIA) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा।
एनआईए (NIA) की दलीलें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शाह की जमानत का कड़ा विरोध किया है:
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साजिश का मुख्य चेहरा: एनआईए का आरोप है कि शाह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे समूहों के संपर्क में थे।
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हवाला लेनदेन: एजेंसी ने दावा किया है कि शाह को विदेशों से भारी मात्रा में धन प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने और सुरक्षा बलों पर पथराव करने के लिए किया गया।
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दस्तावेजी सबूत: एनआईए ने कोर्ट में कई ऐसी डायरियां और डिजिटल सबूत पेश किए हैं, जो कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन की पुष्टि करते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
शब्बीर अहमद शाह ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 12 जून (पिछले वर्ष) को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि शाह की रिहाई से गवाहों को प्रभावित करने और फिर से गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।
एनआईए का आरोप और गिरफ्तारी
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गिरफ्तारी: शाह को एनआईए ने 4 जून, 2019 को गिरफ्तार किया था।
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आरोप: उन पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देने, पथराव और हिंसक गतिविधियों के लिए हवाला और अन्य माध्यमों से फंड जुटाने का गंभीर आरोप है।
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गवाह: एनआईए ने कोर्ट को बताया कि मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अब तक लगभग 30 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है, जबकि कुल गवाहों की संख्या काफी अधिक थी जिसे एजेंसी अब कम करने पर विचार कर रही है।
स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम राहत से इनकार
इससे पहले 4 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शाह के खराब स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। उस समय शाह के वकील ने तर्क दिया था कि उनकी हालत गंभीर है, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत की आवश्यकता को स्वीकार नहीं किया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अलग मामला
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शाह पर केवल एनआईए का ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का भी एक पुराना मनी लॉन्ड्रिंग मामला (2005 का मामला, जिसमें 2017 में गिरफ्तारी हुई थी) चल रहा है। उसमें भी उनकी कई जमानत याचिकाएं निचली अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।
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