नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 8 जनवरी (गुरुवार) तक के लिए स्थगित कर दी है। कोर्ट ने यह निर्णय मामले के रिकॉर्ड को गहराई से देखने की आवश्यकता के चलते लिया है।
प्रमुख घटनाक्रम: आज कोर्ट में क्या हुआ?
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पीठ का गठन: न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
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कल होगी सुनवाई: सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने टिप्पणी की कि उनके सहयोगी न्यायाधीश (न्यायमूर्ति वराले) मामले के रिकॉर्ड का अध्ययन करना चाहते हैं, इसलिए इस पर कल विस्तृत चर्चा की जाएगी।
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कपिल सिब्बल की दलील: वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के इस सुझाव पर सहमति व्यक्त की।
पृष्ठभूमि: आखिर हिरासत का मामला क्या है?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA/रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मृत्यु हुई थी और लगभग 90 लोग घायल हुए थे।
याचिका के मुख्य बिंदु:
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अवैध हिरासत: याचिका में दावा किया गया है कि वांगचुक की हिरासत पूरी तरह से असंवैधानिक, मनमानी और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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पुराने मामले: याचिकाकर्ता का कहना है कि हिरासत का आदेश पुरानी एफआईआर (FIR) और अस्पष्ट आरोपों पर आधारित है, जिसका वर्तमान घटनाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है।
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शांति की अपील: वांगचुक की पत्नी ने दलील दी है कि सोनम ने हमेशा शांति की अपील की है और लेह में हुई हिंसा की उन्होंने कड़ी निंदा की थी।
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