लखनऊ. उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक मंडी, कानपुर (चकरपुर) में शनिवार, 7 मार्च 2026 को अनाज और दलहन की कीमतों में खासी हलचल देखी गई। रबी सीजन की नई फसलों की आवक शुरू होने से ठीक पहले बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। सबसे ज्यादा चर्चा गेहूं की कीमतों को लेकर है, जो सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को पार कर ₹2,750 प्रति क्विंटल के स्तर को छू चुका है।
व्यापारियों और मंडी विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल उत्पादन और मांग के बीच के समीकरण किसानों के पक्ष में नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं कानपुर मंडी के विस्तृत भाव और बाजार का भविष्य का अनुमान।
प्रमुख अनाजों के भाव: गेहूं और मक्का में तेजी
कानपुर मंडी में आज गेहूं की आवक सामान्य रही, लेकिन गुणवत्ता के आधार पर ऊंचे दामों ने सबको चौंका दिया।
| अनाज का नाम | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | औसत भाव (₹/क्विंटल) |
| गेहूं (Wheat) | ₹2,380 | ₹2,750 | ₹2,516 |
| मक्का (Maize) | ₹1,800 | ₹1,900 | ₹1,850 |
| जौ (Barley) | ₹2,250 | ₹2,350 | ₹2,300 |
| ज्वार (Sorghum) | ₹2,100 | ₹2,150 | ₹2,125 |
| चावल (Rice) | – | – | ₹3,295 |
गेहूं के दाम MSP के पार (Analysis)
भारत सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 निर्धारित किया है। कानपुर मंडी में गेहूं का अधिकतम भाव ₹2,750 तक पहुंचना यह दर्शाता है कि निजी खरीदार और फ्लोर मिलर्स स्टॉक जमा करने के लिए सक्रिय हैं। यदि यही रुझान रहा, तो सरकारी खरीद केंद्रों पर आवक कम रह सकती है क्योंकि किसानों को खुले बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं।
दलहन और तिलहन: चने की कुछ किस्मों में भारी उछाल
मंडी में दलहन (Pulses) की कीमतों में आज मिश्रित रुझान देखने को मिला। जहां साधारण चना स्थिर है, वहीं प्रीमियम किस्मों के दाम आसमान छू रहे हैं।
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चना (Gram): सामान्य चने का भाव ₹5,300 से ₹5,400 के बीच रहा। हालांकि, कुछ उच्च गुणवत्ता वाली देसी और काबुली किस्मों का भाव ₹9,750 प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया।
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सरसों (Mustard): नई सरसों की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे भाव ₹5,385 से ₹5,450 के बीच स्थिर बने हुए हैं। तेल मिलों की मांग सामान्य है।
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अरहर/तुअर (Pigeon Pea): अरहर की दाल की ऊंची कीमतों का असर मंडी में भी दिख रहा है। यहां भाव ₹6,500 से ₹6,800 के बीच चल रहे हैं।
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मसूर (Lentil): मसूर के दाम ₹5,650 से ₹5,850 के दायरे में बने हुए हैं।
बाजार विश्लेषण: क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
मंडी विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
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होली और शादियों का सीजन: मार्च के महीने में त्यौहारों और वैवाहिक कार्यक्रमों के कारण आटा, मैदा, बेसन और दालों की मांग में 15-20% का इजाफा हुआ है।
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कम स्टॉक: पिछले सीजन का बचा हुआ स्टॉक अब खत्म होने की कगार पर है, जिससे नई फसल आने तक बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है।
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मौसम का प्रभाव: उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हालिया मौसम के बदलाव से फसल की कटाई में थोड़ी देरी की आशंका है, जिससे आवक पर असर पड़ा है।
किसानों के लिए विशेष सलाह
मंडी सूत्रों का कहना है कि अगले 10-15 दिनों में (मार्च के दूसरे और तीसरे सप्ताह में) जैसे ही धूप तेज होगी, नई फसल की आवक तेजी से बढ़ेगी। अधिक आवक होने पर कीमतों में ₹50 से ₹100 की गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ सुझाव: “किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी उपज को सुखाकर और साफ करके मंडी लाएं ताकि उन्हें अधिकतम भाव मिल सके। भावों में पल-पल उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए मंडी जाने से पहले स्थानीय आढ़तियों से संपर्क जरूर करें।”
7 मार्च 2026 को कानपुर मंडी के भाव किसानों के लिए राहत भरे हैं, विशेषकर गेहूं उत्पादकों के लिए। हालांकि, खुदरा ग्राहकों के लिए बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हो सकती हैं क्योंकि थोक भाव बढ़ने का सीधा असर आटा और दालों की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।
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