नई दिल्ली । मंगलवार, 7 जुलाई 2026
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) ने एक दशक से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे दो खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार किए गए आरोपी दो सगे भाई हैं— फिरासत अली (56) और शाहनवाज अली (51)। इन दोनों को दिल्ली के राजौरी गार्डन थाना इलाके में साल 1996 में हुए एक जघन्य हत्याकांड के मामले में अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी साल 2016 से लगातार फरार चल रहे थे। दिल्ली पुलिस की एंटी-रैडिकलाइजेशन एंड टेरर सेल (ARSC) ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक ऑपरेशन के तहत फिरासत अली को मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) से और शाहनवाज अली को गोड्डा (झारखंड) से दबोचा है।
दिल्ली का मामला (1996): महज एक ‘पुरानी साड़ी’ के विवाद में ले ली थी जान
यह मामला 27 सितंबर 1996 का है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले शराफत अली अपने भाइयों के साथ दिल्ली के रघुबीर नगर (राजौरी गार्डन पुलिस स्टेशन क्षेत्र) में रहते थे और पुराने कपड़ों के बाजार में काम करते थे। उसी बाजार में उनका पड़ोसी शाहनवाज अली भी कपड़े खरीदने आया था।
सुबह करीब 5:00 बजे बाजार में ₹100 की एक पुरानी साड़ी को खरीदने के लेकर शाहनवाज की शराफत अली के भाई इश्तियाक अहमद उर्फ पप्पू के साथ तीखी बहस हो गई। पप्पू ने कहा कि वह वही साड़ी ₹80 में दिला सकता है। इस बात से नाराज होकर शाहनवाज ने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
उसी दिन शाम करीब 4:30 बजे, जब पीड़ित परिवार अपने कमरे में आराम कर रहा था, शाहनवाज अपने भाइयों फिरासत अली, अरशद अली और एक अन्य सहयोगी जहांगीर खान के साथ धारदार चाकुओं से लैस होकर जबरन घर में घुस आया। आरोपियों ने बाथरूम में मौजूद इश्तियाक अहमद उर्फ पप्पू पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। उसकी गर्दन और छाती पर कई वार किए गए। बीच-बचाव करने आए अन्य भाइयों (भूरा और डब्बू) पर भी चाकुओं से वार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान पप्पू की मौत हो गई थी।
अदालती कार्रवाई और फरारी
इस मामले में साल 2000 में कड़कड़डूमा की ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की, जहां से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई। 12 मई 2016 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और उन्हें बची हुई सजा काटने के लिए तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया। मगर, दोनों भाई सरेंडर करने के बजाय फरार हो गए।
मुंबई का मामला (2006): ₹2 लाख की सुपारी और खूंखार कॉन्ट्रैक्ट किलिंग
फरारी के दौरान फिरासत अली ने अपराध की दुनिया में एक और खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। 14 मई 2006 को मुंबई के भेंडी बाजार इलाके में मस्तान तालाब के पास प्लास्टिक के एक बैग में एक अज्ञात इंसान का सिर्फ धड़ (Torso) बरामद हुआ था। मृतक का सिर, हाथ और पैर गायब थे ताकि उसकी पहचान न हो सके।
लगभग 12 साल बाद, जनवरी 2018 में मुंबई पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली, जिससे पता चला कि वह शव किसान खारवा नाम के व्यक्ति का था। जांच में सामने आया कि किसान खारवा अपनी पत्नी बंसीबेन खारवा के साथ अक्सर मारपीट और दुर्व्यवहार करता था। इस घरेलू हिंसा से तंग आकर बंसीबेन ने फिरासत अली और उसके एक साथी को अपने ही पति की हत्या करने के लिए ₹2 लाख की सुपारी (Contract) दी थी।
फिरासत ने बड़ी बेरहमी से किसान खारवा की हत्या की, उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए और धड़ को भेंडी बाजार में फेंककर बाकी अंगों को ठिकाने लगा दिया। 2018 में मुंबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट से बेल मिलने के बाद वह फिर फरार हो गया।
अब सीधे तिहाड़ जेल भेजे गए आरोपी
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दोनों भाइयों को पकड़ने के लिए कस्टमाइज्ड सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके साथ ही, दिल्ली पुलिस ने मुंबई पुलिस को भी फिरासत अली की गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना दे दी है ताकि कॉन्ट्रैक्ट किलिंग केस में भी आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
फैक्ट चेक (Fact Check)
प्राप्त प्रारंभिक विवरणों में कुछ तथ्यात्मक त्रुटियां थीं, जिन्हें पुलिस और अदालती रिकॉर्ड के आधार पर सुधारा गया है:
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मुंबई केस की गिरफ्तारी: फिरासत अली को मुंबई पुलिस ने पहली बार 2018 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट से उसे साल 2021 में जमानत मिली थी, जिसके बाद वह फिर से फरार हो गया और उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) माना गया।
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2023 की फरलो (Furlough) का उल्लंघन: दिल्ली के मर्डर केस के सिलसिले में फिरासत अली को साल 2023 में दो हफ्ते की ‘फरलो’ (अस्थायी रिहाई) दी गई थी, लेकिन वह समय सीमा समाप्त होने के बाद जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के बजाय फिर से अंडरग्राउंड हो गया था।
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पहचान छुपाने का तरीका: दोनों भाई अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे कई राज्यों में लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और पहचान छुपाकर पुराने कपड़ों के व्यापारी के रूप में काम कर रहे थे।
Matribhumisamachar


