बठिंडा: बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी (हिमाचल प्रदेश) से भाजपा सांसद कंगना रनौत की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बठिंडा की एक विशेष अदालत (MP-MLA कोर्ट) ने मानहानि के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कंगना को 15 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2021 के किसान आंदोलन के दौरान कंगना रनौत द्वारा किए गए एक विवादित ट्वीट से जुड़ा है। उन्होंने बठिंडा के गांव बहादुरगढ़ जंडियां की 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला किसान महिंदर कौर को ‘शाहीन बाग की दादी’ (बिलकिस बानो) समझ लिया था और टिप्पणी की थी कि ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में शामिल होती हैं। इस अपमानजनक टिप्पणी से आहत होकर महिंदर कौर ने कंगना के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हालिया सुनवाई के दौरान कंगना अदालत में पेश नहीं हुईं। उनके वकील ने ‘मुंबई में पूर्व-निर्धारित आधिकारिक व्यस्तताओं’ का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दिया।
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अदालत का रुख: ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बार-बार अलग-अलग आधार पर पेशी से छूट मांगना कानून की प्रक्रिया में देरी करने जैसा है।
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पिछली दलील: इससे पहले संसद के शीतकालीन सत्र का हवाला देकर छूट ली गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब सत्र समाप्त हो चुका है और बिना किसी ठोस दस्तावेजी सबूत के दोबारा छूट नहीं दी जा सकती।
आगे क्या हो सकता है?
अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि कंगना रनौत 15 जनवरी को पेश नहीं होती हैं, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है और उनकी जमानत भी रद्द की जा सकती है। 15 जनवरी को ही उनकी उस अर्जी पर भी बहस होगी जिसमें उन्होंने कोर्ट में स्थायी रूप से व्यक्तिगत पेशी से छूट (धारा 205 CrPC के तहत) मांगी है।
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