मॉस्को. रूस ने हाल ही में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा यूक्रेन में सेना तैनात करने की योजनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन की धरती पर कदम रखने वाला कोई भी विदेशी सैनिक रूसी सेना का “वैध निशाना” (Legitimate Target) होगा। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव एक नए चरम पर पहुँच गया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ब्रिटेन और फ्रांस अपनी घोषणा के अनुसार यूक्रेन में सेना तैनात करते हैं, तो उन पर सीधे हमले किए जाएंगे।
विवाद की जड़: ‘कोलिशन ऑफ द विलिंग’ समिट
यह चेतावनी मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को पेरिस में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आई है। इस शिखर सम्मेलन में:
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ‘आशय पत्र’ (Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए।
दोनों देशों ने युद्धविराम या शांति समझौते की स्थिति में यूक्रेन में अपने सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई है।
योजना के अनुसार, ये सैनिक यूक्रेन में ‘मिलिट्री हब’ स्थापित करेंगे ताकि भविष्य में रूसी हमलों को रोका जा सके और यूक्रेनी सेना को प्रशिक्षित किया जा सके।
रूस का सख्त रुख: “यह युद्ध का अक्ष है”
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने एक आधिकारिक बयान में कहा:
“यूक्रेन के क्षेत्र में पश्चिमी देशों की सैन्य इकाइयों, डिपो और बुनियादी ढांचे की तैनाती को ‘विदेशी हस्तक्षेप’ माना जाएगा। ये सभी रूसी सशस्त्र बलों के लिए वैध सैन्य लक्ष्य (Legitimate Combat Targets) होंगे।”
रूस ने इस गठबंधन को “Axis of War” (युद्ध का अक्ष) बताते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की ये “सैन्यवादी घोषणाएं” शांति की संभावनाओं को और दूर कर रही हैं।
क्या है ब्रिटेन और फ्रांस की योजना?
ब्रिटेन और फ्रांस ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना का उद्देश्य रूस के साथ सीधे युद्ध में शामिल होना नहीं है, बल्कि:
शांति बनाए रखना: युद्धविराम के बाद सुरक्षा गारंटी देना।
मिलिट्री हब्स: हथियारों के रखरखाव और यूक्रेनी आकाश और समुद्र की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना।
हजारों सैनिकों की तैनाती: मैक्रों ने संकेत दिया है कि फ्रांस अकेले ही कई हजार सैनिक भेज सकता है।
वर्तमान स्थिति और प्रभाव
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस कदम को “ऐतिहासिक” बताया है, लेकिन रूस की इस ताजा धमकी ने शांति वार्ता की कोशिशों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि नाटो देशों के सैनिक यूक्रेन में तैनात होते हैं, तो यह सीधे तौर पर रूस और नाटो के बीच सीधे युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
अमेरिका चाहता है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी यूरोपीय देश (विशेषकर ब्रिटेन और फ्रांस) उठाएं। रूस की ओर से ‘वैध निशाना’ बनाने की धमकी पर अमेरिका ने सीधे तौर पर कोई जवाबी धमकी नहीं दी है, बल्कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
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