कानपुर. उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक मंडियों में से एक, कानपुर की चकरपुर अनाज मंडी में रविवार को कृषि जिंसों के भावों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। साप्ताहिक अवकाश (रविवार) होने के कारण मंडी में नई आवक काफी सीमित रही, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश फसलों के दाम पिछले कारोबारी सत्र (7 मार्च) के स्तर पर ही टिके रहे। हालांकि, गेहूं की चुनिंदा किस्मों में मजबूती दर्ज की गई है, जो ₹2,850 प्रति क्विंटल के स्तर को छू गई हैं।
बाजार विशेषज्ञों और स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि वर्तमान में बाजार ‘रुको और देखो’ की स्थिति में है। नई फसल की आवक शुरू होने से पहले स्टॉक की स्थिति और मांग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
अनाज बाजार: गेहूं और मोटे अनाज की स्थिति
चकरपुर मंडी में आज गेहूं (हाइब्रिड/फार्म) की मांग में तेजी देखी गई। अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के दाम ₹2,700 से शुरू होकर ₹2,850 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। वहीं, सामान्य गेहूं (दारा) ₹2,450 से ₹2,500 के बीच बना हुआ है।
मोटे अनाजों की बात करें तो बाजार में स्थिरता का माहौल है:
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जौ: ₹2,250 से ₹2,350 प्रति क्विंटल।
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ज्वार: ₹2,100 से ₹2,150 प्रति क्विंटल।
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बाजरा: ₹2,000 से ₹2,250 प्रति क्विंटल।
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मक्का: ₹1,900 से ₹2,200 प्रति क्विंटल।
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धान: ₹2,000 से ₹2,100 प्रति क्विंटल।
दलहन और तिलहन: कीमतों में ठहराव
दलहन वर्ग में शनिवार के मुकाबले कोई बड़ा फेरबदल नहीं देखा गया। व्यापारियों के अनुसार, दालों की मांग सामान्य बनी हुई है। चने का भाव ₹5,400 से ₹5,500 के दायरे में है, जबकि अरहर (तुअर) ₹7,000 से ₹7,500 प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रही है।
तिलहन बाजार में सरसों की कीमतों ने राहत दी है। सरसों ₹5,400 से ₹5,450 प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर है। लाही के भाव ₹6,500 से ₹6,600 के बीच दर्ज किए गए। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए आने वाले हफ्तों में तिलहन की मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अन्य आवश्यक वस्तुएं: चीनी और खाद्य तेल
अनाज के साथ-साथ किराना बाजार की प्रमुख वस्तुओं के दाम भी स्थिर रहे:
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चीनी (M-30): ₹4,340 से ₹4,400 प्रति क्विंटल।
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देसी घी (खुर्जा): ₹67,000 से ₹68,000 प्रति क्विंटल।
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सरसों तेल (कोल्हू): ₹15,100 से ₹15,200 प्रति क्विंटल।
बाजार विश्लेषण और भविष्य का अनुमान
चकरपुर मंडी के अनुभवी व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में भावों की स्थिरता का मुख्य कारण रविवार की कम आवक है। सोमवार को मंडी खुलने पर जब नई आवक बढ़ेगी, तब कीमतों में वास्तविक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विशेष टिप: व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम भाव हमेशा फसल की नमी (Moisture content), दाने की चमक और मंडी में पहुंचने वाले माल की कुल मात्रा पर निर्भर करते हैं। यदि फसल में नमी अधिक होती है, तो किसानों को उम्मीद से कम दाम मिल सकते हैं।
किसानों और व्यापारियों के लिए सुझाव
वर्तमान बाजार स्थितियों को देखते हुए, किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी उपज को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही मंडी लाएं ताकि उन्हें अधिकतम भाव मिल सके। वहीं, थोक व्यापारियों की नजर सरकार द्वारा गेहूं के स्टॉक की सीमा और निर्यात संबंधी आगामी फैसलों पर टिकी है।
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