कानपुर | बुधवार, 1 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक मंडी, कानपुर (चाकरपुर/नौबस्ता) में नए वित्त वर्ष के पहले दिन अनाज और दलहन के बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक ओर गेहूं और मोटे अनाजों की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर दलहन बाजार में ‘प्रोटीन’ महंगा होता दिख रहा है। विशेष रूप से उड़द और मूंग दाल की कीमतों में आई तेजी ने उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
🌾 अनाज बाजार: गेहूं की मांग मजबूत, आवक संतुलित
कानपुर मंडी में गेहूं की आवक वर्तमान में संतुलित है। व्यापारियों के अनुसार, रबी सीजन की नई फसल के दबाव के बावजूद औद्योगिक मांग के चलते कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
| अनाज का नाम | न्यूनतम भाव (₹) | अधिकतम भाव (₹) | औसत भाव (₹) |
| गेहूं | 2,375 | 2,750 | 2,513.68 |
| जौ | 2,250 | 2,350 | 2,300 |
| बाजरा | 1,900 | 2,100 | 2,000 |
| मक्का | 1,600 | 1,800 | 1,700 |
| ज्वार | 2,100 | 2,150 | 2,125 |
एक्सपर्ट नोट: सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार भाव के बीच कम अंतर होने के कारण किसान सीधे मंडियों में फसल लाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
व्यापार जगत: उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडियों के साप्ताहिक समाचार
🫘 दलहन: उड़द दाल ₹10,000 के पार, मूंग में भी ‘उबाल’
दलहन खंड में आज सबसे ज्यादा हलचल देखी गई। उड़द और मूंग दाल के दाम ऊंचे स्तर पर टिके हुए हैं, जो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में महंगाई बढ़ा सकते हैं।
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उड़द दाल: आज औसतन ₹10,497 प्रति क्विंटल पर बंद हुई।
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मूंग दाल: गुणवत्ता के आधार पर ₹8,000 से ₹9,500 के बीच बिक रही है।
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चना दाल: स्थिर रुख के साथ ₹6,800 (औसत) पर बनी हुई है।
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मटर: दलहन में सबसे सस्ता विकल्प बनी हुई है, जिसका भाव ₹3,600 – ₹4,000 है।
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अरहर (तुअर): मध्यम मांग के बीच ₹5,700 – ₹6,800 के दायरे में कारोबार कर रही है।
🌻 तिलहन और अन्य: सरसों में हल्की तेजी, चीनी-आटा स्थिर
तेल मिलों की सक्रियता के कारण सरसों के भाव में मजबूती देखी गई। वहीं, घरेलू जरूरतों की वस्तुएं जैसे आटा और चीनी के दाम आम आदमी के लिए राहत भरे रहे।
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सरसों: ₹5,700 से ₹7,050 प्रति क्विंटल।
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चीनी (M/30): ₹4,000 से ₹4,120 प्रति क्विंटल।
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आटा (50 किलो बैग): ₹1,500 से ₹1,600 (यानी ₹30-32 प्रति किलो थोक)।
📊 बाजार विश्लेषण: आगे क्या होगा?
कानपुर के वरिष्ठ व्यापारियों का मानना है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह से मंडियों में गेहूं की आवक चरम पर होगी। यदि मौसम अनुकूल रहता है, तो आवक बढ़ने पर कीमतों में 2-3% का करेक्शन (गिरावट) देखा जा सकता है। हालांकि, दलहन में स्टॉक कम होने और मांग अधिक होने के कारण कीमतों में नरमी के आसार फिलहाल कम हैं।
किसानों के लिए सलाह: मंडी में अपनी फसल लाने से पहले नमी (Moisture) की जांच जरूर कर लें, क्योंकि अच्छी सूखी फसल पर ही व्यापारियों द्वारा अधिकतम बोली (₹2,750 तक) लगाई जा रही है।
डिस्क्लेमर: ऊपर दिए गए भाव मंडी के थोक आंकड़ों पर आधारित हैं। स्थानीय फुटकर बाजार में कीमतें अलग हो सकती हैं।
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