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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बंगाल दौरे पर घमासान: ममता सरकार ने केंद्र को भेजा कड़ा जवाब

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सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति का कार्यक्रम।

कोलकाता. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बंगाल दौरे पर मचे घमासान के बीच ममता बनर्जी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपना स्पष्टीकरण भेज दिया है। जहाँ एक ओर केंद्र ने इसे ‘अक्षम्य लापरवाही’ बताया है, वहीं राज्य सरकार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

ममता सरकार का जवाब: “प्रोटोकॉल का कोई उल्लंघन नहीं हुआ”

राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव द्वारा भेजे गए जवाब में निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं:

  • निजी कार्यक्रम का तर्क: राज्य सरकार ने कहा कि सिलीगुड़ी में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन’ एक निजी संस्था द्वारा आयोजित था, न कि राज्य सरकार द्वारा। इसलिए, मेजबानी की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की थी।

  • लाइनअप का पालन: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई सिलीगुड़ी के मेयर, दार्जिलिंग के DM और पुलिस कमिश्नर द्वारा की गई, जो राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा साझा किए गए ‘अनुमोदित लाइनअप’ (Approved Lineup) के अनुसार ही था।

  • स्थान परिवर्तन का कारण: प्रशासन ने दावा किया कि मूल स्थान (बिधाननगर) पर आयोजकों की तैयारियां अधूरी थीं, जिसके बारे में राष्ट्रपति सचिवालय को पहले ही लिखित और मौखिक रूप से सूचित कर दिया गया था। सुरक्षा कारणों से ही कार्यक्रम को बागडोगरा के पास स्थानांतरित किया गया।

केंद्र की सख्ती और राष्ट्रपति की नाराजगी

जवाब के बावजूद, केंद्र सरकार राज्य के तर्कों से संतुष्ट नहीं दिख रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि:

  1. संवैधानिक मर्यादा: राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री या उनके किसी वरिष्ठ मंत्री का न होना ‘ब्लू बुक’ परंपराओं का स्पष्ट उल्लंघन है।

  2. बुनियादी खामियां: वॉशरूम में पानी न होना और रास्ते में गंदगी मिलना प्रशासनिक विफलता है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्वयं राष्ट्रपति मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताते हुए कहा था, “मैं बंगाल की बेटी हूँ और ममता दीदी मेरी छोटी बहन जैसी हैं, फिर भी समझ नहीं आता कि राज्य नेतृत्व क्यों अनुपस्थित रहा।”

राजनीतिक घमासान: “शर्मनाक और अभूतपूर्व” — पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” करार देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने न केवल राष्ट्रपति का, बल्कि आदिवासी समाज और संताल संस्कृति का भी अपमान किया है। पश्चिम बंगाल भाजपा ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की है।

अब आगे क्या? भारत सरकार का संभावित निर्णय

सूत्रों के मुताबिक, यदि राज्य सरकार के आधिकारिक जवाब में तथ्यों की कमी पाई जाती है, तो केंद्र सरकार निम्नलिखित कड़े कदम उठा सकती है:

  • अधिकारियों को तलब करना: दार्जिलिंग के DM और सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर को दिल्ली बुलाकर पूछताछ की जा सकती है।

  • प्रशासकीय नोटिस: मुख्य सचिव के खिलाफ ‘ड्यूटी में लापरवाही’ के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

  • संवैधानिक रिपोर्ट: राज्यपाल से इस पूरे घटनाक्रम पर एक स्वतंत्र रिपोर्ट मांगी जा सकती है, जो केंद्र-राज्य संबंधों में और जटिलता पैदा कर सकती है।

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