गुरुग्राम ।
हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फतेहपुर झारसा, सेक्टर-47 में वर्षों से उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार रहे 2.5 एकड़ के पारंपरिक जलाशय (जोहड़) के दिन अब बदलने वाले हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए जलाशय की जमीन पर बने सभी अवैध निर्माणों को तुरंत हटाने और जल निकाय को उसके मूल स्वरूप में बहाल (Restore & Rejuvenate) करने के निर्देश दिए हैं।
शहरों में तेजी से कंक्रीट के जंगल खड़े होने के कारण जलस्रोत विलुप्त हो रहे हैं। ऐसे समय में NGT का यह फैसला न केवल गुरुग्राम के भूजल स्तर को सुधारने में मददगार साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी नज़ीर बनेगा।
सरकारी सीमांकन में सामने आया अतिक्रमण का पूरा ढांचा
मामले की सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए आधिकारिक सीमांकन में यह बात खुलकर सामने आई कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ‘जोहड़’ की जमीन पर किस तरह से अतिक्रमण फैला हुआ था:
- सरकारी बांध पर झुग्गियां: करीब 275 वर्ग गज के क्षेत्र में बनी 7 झुग्गियां जोहड़ के बांध पर पाई गईं।
- धार्मिक व अन्य निर्माण: लगभग 39 वर्ग गज क्षेत्र में एक मंदिर और करीब 5 वर्ग गज का एक पक्का प्लेटफॉर्म निर्मित था।
- सड़क और फुटपाथ: जल निकाय के आसपास लगभग 1,077 वर्ग गज के बड़े भू-भाग में सड़क और फुटपाथ दर्ज किए गए।
मामला NGT कैसे पहुंचा?
वर्ष 2023 में स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने NGT का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में शिकायत की गई थी कि इस ऐतिहासिक जलाशय का उपयोग कचरा फेंकने, अवैध कब्जा करने, पशुओं को चराने और धीरे-धीरे इसे सुखाकर जमीन पर कब्जा करने के लिए किया जा रहा है।
अतिक्रमणकारियों द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व के status quo (यथास्थिति) आदेश का हवाला देकर निर्माणों को बचाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, NGT ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का यथास्थिति का आदेश जलाशय की जमीन पर किए गए किसी भी अवैध निर्माण या कब्जे को सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला और कानूनी महत्व
NGT ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) के उन पूर्व निर्णयों का प्रमुखता से उल्लेख किया, जिनमें जल निकायों के सार्वजनिक संरक्षण को राज्य की अनिवार्य जिम्मेदारी बताया गया है।
न्यायालयों ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि:
- जल निकायों का स्वरूप नहीं बदला जा सकता: किसी भी तालाब, जोहड़ या झील की भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए डायवर्ट या अतिक्रमित नहीं किया जा सकता।
- सार्वजनिक ट्रस्ट का सिद्धांत (Public Trust Doctrine): प्राकृतिक संसाधन पूरे समाज की धरोहर हैं और सरकार इनका संरक्षण करने के लिए बाध्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1: NGT ने गुरुग्राम के किस जलाशय पर आदेश दिया है?
उत्तर: NGT ने गुरुग्राम के Sector-47, फतेहपुर झारसा में स्थित लगभग 2.5 एकड़ के जलाशय (जोहड़) से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है।
Q2: जोहड़ की जमीन पर क्या-क्या अवैध निर्माण पाए गए?
उत्तर: सीमांकन के दौरान बांध पर 7 झुग्गियां (275 वर्ग गज), एक मंदिर (39 वर्ग गज), एक पक्का प्लेटफॉर्म (5 वर्ग गज) और लगभग 1,077 वर्ग गज में बनी सड़क व फुटपाथ दर्ज किए गए।
Q3: क्या हाईकोर्ट का ‘Status Quo’ आदेश अतिक्रमण को बचाता है?
उत्तर: नहीं, NGT ने स्पष्ट किया है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्टेटस को (यथास्थिति) आदेश जोहड़ क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को कोई सुरक्षा या वैधता प्रदान नहीं करता।
Q4: NGT के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य अवैध कब्जों को हटाकर जोहड़ को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना, स्वच्छ बनाना और पर्यावरण व भूजल स्तर को बेहतर करना है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की कार्यवाही, प्रस्तुत याचिकाओं और सार्वजनिक मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामान्य सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी कानूनी प्रक्रिया या प्रशासनिक कार्रवाई के आधिकारिक विवरण हेतु कृपया NGT के आधिकारिक आदेश अथवा संबंधित विभाग की अधिसूचना का अवलोकन करें।

