जींद । शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
भारतीय रेलवे के इतिहास में 17 जुलाई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली पर्यावरण-अनुकूल ‘हाइड्रोजन ट्रेन’ (Hydrogen-Powered Train) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार की गई यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ चलती है और पूरी दुनिया में केवल चुनिंदा देशों के पास ही यह उन्नत तकनीक मौजूद है।
ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट (जैसे मिडिल-ईस्ट में चल रहा तनाव) का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत के लिए कच्चे तेल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर आता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा: “अगर यह वैश्विक संकट साल 2014 से पहले आया होता, तो भारतीय रेल के पहिए पूरी तरह थम जाते। 2014 में देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा था, जहाँ ट्रेनें केवल डीजल इंजनों के भरोसे चलती थीं। यदि डीजल की सप्लाई रुक जाती, तो देश एक अभूतपूर्व संकट में फंस जाता। लेकिन यह आज का नया भारत है, जहाँ समस्या आने से पहले ही उसके समाधान पर जमीन पर काम शुरू हो जाता है।”
12 वर्षों में बदला रेलवे का ढांचा: 99% नेटवर्क का हुआ विद्युतीकरण
पीएम मोदी ने देश के सामने आंकड़े रखते हुए बताया कि भारतीय रेलवे में बिजलीकरण की शुरुआत करीब 100 साल पहले, यानी 1925 में हुई थी। लेकिन 1925 से लेकर 2014 तक के 90 सालों में देश के रेल नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही बिजली से जुड़ पाया था और 70 प्रतिशत हिस्सा डीजल पर ही निर्भर रहा।
इसके विपरीत, बीते 12 वर्षों के भीतर भारत के करीब 99 प्रतिशत ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का पूरी तरह से विद्युतीकरण (Electrification) किया जा चुका है। वहीं, हरियाणा राज्य में तो रेल नेटवर्क का शत-प्रतिशत (100%) बिजलीकरण पूरा हो चुका है। इसी दूरदर्शिता का नतीजा है कि दुनिया में तेल संकट या युद्ध जैसी स्थितियां होने के बावजूद भारत की विकास की गाड़ी बिना रुके आगे बढ़ रही है。
दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन: भारत ने गाड़ा सफलता का झंडा
इस तकनीक की खूबियों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी की रेल अब हाइड्रोजन ईंधनों से संचालित होगी। वर्तमान में जर्मनी, चीन, जापान और अमेरिका जैसे गिने-चुने देशों के पास ही हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक उपलब्ध है।
विश्व स्तर पर जहां अन्य देश 2 से 4 कोच वाली छोटी ट्रेनों का परीक्षण कर रहे हैं, वहीं भारत ने 10 कोच वाली पैसेंजर ट्रेन ट्रैक पर उतारकर दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेनों में से एक है, जिसकी कुल क्षमता करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने की है।
कैसे काम करती है यह स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, यह ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण रहित है। इसमें पारंपरिक ट्रेनों की तरह न तो ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों की आवश्यकता होती है और न ही डीजल की।
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ईंधन सेल सिद्धांत: ट्रेन के ऊपर लगे सिलेंडरों में अत्यधिक दबाव पर हाइड्रोजन को स्टोर किया जाता है। यह हाइड्रोजन बाहरी हवा से ऑक्सीजन लेकर केमिकल रिएक्शन (रासायनिक प्रक्रिया) करता है, जिससे बिजली बनती है।
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शून्य प्रदूषण: इस पूरी प्रक्रिया में बाई-प्रोडक्ट (उपोत्पाद) के रूप में केवल पानी की भाप (Water Vapour) और गर्मी निकलती है। इसमें किसी भी तरह का धुआं या हानिकारक कार्बन उत्सर्जन नहीं होता।
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रूट और रफ्तार: यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत (Jind-Sonipat Route) के बीच 89 किलोमीटर लंबे रूट पर चलाई जा रही है। इसकी डिजाइन स्पीड 110 किमी प्रति घंटा है, जिसे शुरुआती दौर में 75 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति पर चलाया जा रहा है।
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विश्वसनीय सुरक्षा: सुरक्षा के लिहाज से इसमें मल्टी-लेयर सेंसर लगाए गए हैं, जो हाइड्रोजन लीक, आग या धुएं का तुरंत पता लगाकर सुरक्षा प्रणालियों को एक्टिव कर देते हैं। जींद में ही इसके लिए देश का पहला एकीकृत हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग और स्टोरेज स्टेशन भी स्थापित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन किस रूट पर शुरू की गई है?
उत्तर: यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों के बीच (दूरी लगभग 89 किमी) चलाई जा रही है।
प्रश्न 2: हाइड्रोजन ट्रेन से कितना प्रदूषण होता है?
उत्तर: यह ट्रेन 100% पर्यावरण के अनुकूल है। इससे शून्य (Zero) कार्बन उत्सर्जन होता है और इसके साइलेंसर से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलती है।
प्रश्न 3: वर्तमान में भारत का कितना रेल नेटवर्क बिजली से चल रहा है?
उत्तर: पिछले 12 वर्षों के अथक प्रयासों के बाद भारतीय रेलवे का लगभग 99% ब्रॉडगेज नेटवर्क पूरी तरह से विद्युतीकृत हो चुका है।
प्रश्न 4: हाइड्रोजन ट्रेन की यात्री क्षमता और कोच की संख्या कितनी है?
उत्तर: भारत द्वारा शुरू की गई इस विशेष ट्रेन में 10 कोच (2 पावर कार और 8 ट्रेलर कोच) हैं, जिसमें एक बार में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी प्रधानमंत्री के भाषण और आधिकारिक रेलवे समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। यह लेख पाठकों की सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए मातृभूमि समाचार ब्यूरो द्वारा संकलित किया गया है।
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