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मातृभूमि समाचार विशेष : श्री राम जन्मभूमि मंदिर: आस्था, वास्तुकला और गौरव का संगम

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अयोध्या का श्री राम जन्मभूमि मंदिर केवल पत्थरों और नक्काशी से बना एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों लोगों की सदियों पुरानी प्रतीक्षा, अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। 22 जनवरी 2024 को हुई इसकी प्राण प्रतिष्ठा ने विश्व इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अयोध्या, जिसे भगवान श्री राम की जन्मस्थली माना जाता है, सदियों तक कानूनी और ऐतिहासिक संघर्षों का केंद्र रही। लंबे कानूनी विवाद के बाद, 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राम जन्मभूमि की भूमि को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दिया। इसके बाद ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट का गठन हुआ और 5 अगस्त 2020 को मंदिर का भूमि पूजन संपन्न हुआ।

स्थापत्य कला और डिजाइन

राम मंदिर का निर्माण पारंपरिक भारतीय ‘नगर शैली’ (Nagara Style) में किया गया है। इसके मुख्य शिल्पकार प्रसिद्ध चंद्रकांत सोमपुरा और उनके पुत्र हैं।

  • विशालता: मंदिर की लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है। यह तीन मंजिला है और प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट है।

  • स्तंभ और मंडप: मंदिर में कुल 392 स्तंभ और 44 द्वार हैं। इसमें पांच मुख्य मंडप बनाए गए हैं:

    1. नृत्य मंडप

    2. रंग मंडप

    3. सभा मंडप

    4. प्रार्थना मंडप

    5. कीर्तन मंडप

  • अनोखी तकनीक: मंदिर के निर्माण में लोहे (Steel) का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया है। पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों और विशेष निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है ताकि मंदिर हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहे।

राम लला की दिव्य प्रतिमा

मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री राम के 5 वर्षीय बाल स्वरूप (राम लला) की प्रतिमा स्थापित है।

  • मूर्तिकार: इस अद्भुत प्रतिमा को कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कृष्ण शिला (काली चट्टान) से तराशा है।

  • सूर्य तिलक: मंदिर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि प्रत्येक वर्ष ‘राम नवमी’ के दिन सूर्य की किरणें सीधे राम लला के ललाट (माथे) पर पड़ेंगी, जिसे ‘सूर्य तिलक’ कहा जाता है।

मंदिर परिसर की विशेषताएं

  • परकोटा: मंदिर के चारों ओर एक आयताकार दीवार (732 मीटर लंबी) बनाई गई है। इसके चारों कोनों पर सूर्य देव, माता भगवती, गणपति और भगवान शिव के मंदिर स्थित हैं।

  • प्राचीन प्रतीक: मंदिर परिसर में ‘कुबेर टीला’ पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया गया है और वहां जटायु की प्रतिमा स्थापित की गई है।

  • आत्मनिर्भर परिसर: यह मंदिर आधुनिक सुविधाओं जैसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और अग्नि सुरक्षा प्रणाली से लैस है, जिससे यह स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव नहीं डालता।

दर्शन और यात्रा संबंधी जानकारी

आज अयोध्या एक आधुनिक पर्यटन केंद्र बन चुकी है:

  • पहुँच: यहाँ महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और भव्य ‘अयोध्या धाम’ रेलवे स्टेशन बनाया गया है।

  • दर्शन समय: भक्त सुबह 6:30 से दोपहर 12:15 तक और फिर शाम 4:00 से रात 10:00 बजे तक दर्शन कर सकते हैं।

  • आरती: मंदिर में श्रृंगार, भोग और संध्या आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।

आरती पास ऑनलाइन कैसे बुक करें? (How to Book Aarti Pass)

श्री राम जन्मभूमि मंदिर की आरती में शामिल होने के लिए आप ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन पास बुक कर सकते हैं।

  • वेबसाइट: srjbtkshetra.org

  • प्रक्रिया:

    1. वेबसाइट पर ‘Aarti’ सेक्शन में जाएं।

    2. आरती का प्रकार (श्रृंगार, भोग या संध्या) और तारीख चुनें।

    3. अपनी जानकारी (नाम, मोबाइल नंबर, फोटो आईडी आदि) दर्ज करें।

    4. सफलतापूर्वक बुकिंग के बाद, आपको एक ईमेल और SMS मिलेगा।

  • ध्यान दें: आरती पास निशुल्क होते हैं, लेकिन सीमित संख्या के कारण इन्हें पहले से बुक करना बेहतर होता है। आपको मंदिर के पास ‘आरती पास काउंटर’ से अपना फिजिकल पास लेना होगा। आरती, मंदिर दर्शन व के समय अन्य नियमों में आवश्यकतानुसार परिवर्तन संभव है।

अयोध्या के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के अतिरिक्त, अयोध्या में कई ऐसे स्थान हैं जो रामायण काल की स्मृतियों को जीवंत करते हैं:

हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi)

अयोध्या की परंपरा के अनुसार, भगवान राम के दर्शन करने से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं।

  • मान्यता: माना जाता है कि हनुमान जी यहाँ एक गुफा में रहकर पूरी अयोध्या की रक्षा करते थे।

  • विशेषता: यह एक ऊंचे टीले पर स्थित मंदिर है, जहाँ पहुँचने के लिए लगभग 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा के साथ-साथ उनके बाल स्वरूप की गोद में माता अंजनी की प्रतिमा भी विराजमान है।

कनक भवन (Kanak Bhawan)

इसे अयोध्या का सबसे सुंदर और भव्य महलनुमा मंदिर माना जाता है।

  • इतिहास: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह महल माता कैकेयी ने देवी सीता को मुँह दिखाई के उपहार में दिया था।

  • आकर्षण: यहाँ भगवान राम और माता सीता की स्वर्ण मुकुट पहने हुए अत्यंत सुंदर प्रतिमाएँ हैं। इसकी वास्तुकला किसी महल जैसी लगती है, इसलिए इसे ‘सोने का घर’ भी कहा जाता है।

सरयू नदी और राम की पैड़ी (Saryu Ghat & Ram Ki Paidi)

सरयू नदी अयोध्या की जीवनरेखा है।

  • सरयू आरती: वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर यहाँ भी प्रतिदिन भव्य सरयू आरती होती है, जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

  • राम की पैड़ी: यह सरयू के तट पर बने घाटों की एक श्रृंखला है। दीपोत्सव के समय यहाँ लाखों दीये जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया जाता है। रात के समय यहाँ की लाइटिंग और फव्वारे देखने लायक होते हैं।

नागेश्वरनाथ मंदिर (Nageshwarnath Temple)

  • महत्व: कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी।

  • विशेषता: यह शिव मंदिर राम की पैड़ी के पास स्थित है और शिवरात्रि के दौरान यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है।

मणि पर्वत (Mani Parvat)

  • कथा: माना जाता है कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी वाला पर्वत लेकर जा रहे थे, तब उसका एक छोटा हिस्सा यहाँ गिर गया था। यह टीला लगभग 65 फीट ऊंचा है और यहाँ से अयोध्या का मनोरम दृश्य दिखता है।

लता मंगेशकर चौक (Lata Mangeshkar Chowk)

  • आधुनिक आकर्षण: यह अयोध्या का एक नया प्रमुख लैंडमार्क है। यहाँ एक विशाल 40 फीट लंबी वीणा स्थापित की गई है, जो महान गायिका लता मंगेशकर को समर्पित है। यह स्थान पर्यटकों के लिए फोटो खिंचवाने का पसंदीदा केंद्र बन गया है।

अयोध्या यात्रा के लिए विशेष सुझाव

  • पैदल यात्रा का आनंद: अयोध्या की गलियों में राम नाम की गूँज और पुराने मंदिरों की खुशबू है। राम पथ और भक्ति पथ जैसे नए चौड़े रास्तों पर पैदल चलना एक अलग अनुभव देता है।

  • स्थानीय व्यंजन: अयोध्या की गलियों की कचौड़ी-सब्जी और यहाँ के प्रसिद्ध लड्डू (हनुमानगढ़ी का प्रसाद) चखना न भूलें।

अयोध्या कैसे पहुँचें? (How to Reach)

  • हवाई मार्ग (By Air): अब अयोध्या का अपना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है—महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (AYO)। यह मंदिर से मात्र 10-15 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा आप लखनऊ (LKO) एयरपोर्ट भी आ सकते हैं।

  • रेल मार्ग (By Train): ‘अयोध्या धाम जंक्शन’ (Ayodhya Dham Junction) मुख्य स्टेशन है, जिसे बहुत भव्य बनाया गया है। यहाँ से मंदिर की दूरी केवल 1.5 से 2 किमी है।

  • सड़क मार्ग (By Road): अयोध्या लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

अयोध्या में ठहरने के विकल्प

अयोध्या में ठहरने के लिए कई बजट और मध्यम श्रेणी के विकल्प उपलब्ध हैं।

होटल का नाम खासियत अनुमानित किराया (प्रति रात)
श्री राम होटल शाकाहारी रेस्टोरेंट, पार्किंग, मंदिर के करीब। ₹1,700 – ₹2,000
होटल श्री राजेंद्र इन राम मंदिर का दृश्य (View), अच्छी रेटिंग। ₹1,100 – ₹1,300
साँची विला शांत वातावरण और अच्छी सुविधाएं। ₹1,000 – ₹1,200
सियाराम कुंज होटल मध्यम बजट में आरामदायक कमरा। ₹2,000 – ₹2,200
श्री राम टेंपल व्यू बजट के अनुकूल और मंदिर के बिल्कुल पास। ₹900 – ₹1,100

अन्य विकल्प:

  • धर्मशालाएं: राम की पैड़ी और हनुमानगढ़ी के पास कई प्राचीन और आधुनिक धर्मशालाएं (जैसे बिड़ला धर्मशाला) उपलब्ध हैं, जो काफी किफायती हैं।

  • होमस्टे: अयोध्या प्रशासन ने कई स्थानीय घरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत किया है, जहाँ आप स्थानीय संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं।

सुझाव: यदि आप सप्ताहांत में जा रहे हैं, तो होटल कम से कम 15-20 दिन पहले बुक कर लें। ठहरने के विकल्पों पर अंतिम विचार करने से पहले अपने स्तर पर भी जानकारी एकत्रित कर लें।

 

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