कानपुर: फरवरी 2026 में कानपुर की वायु गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 322 दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में हवा की गति नहीं बढ़ी और प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
📊 आज का AQI अपडेट | 10 फरवरी 2026
| प्रदूषक | सांद्रता | स्थिति |
|---|---|---|
| PM2.5 | 149 µg/m³ | गंभीर |
| PM10 | 179 µg/m³ | खराब |
| NO₂ | 32 ppb | सामान्य |
| O₃ (ओज़ोन) | 21 ppb | अच्छा |
महत्वपूर्ण अपडेट:
रात और तड़के सुबह प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया जा रहा है। 6–7 फरवरी को रात 9 बजे AQI 248 था, जबकि 10 फरवरी की सुबह यह 300 से ऊपर पहुंच गया, जिससे स्मॉग जैसी स्थिति बन गई।
🌫️ कानपुर में बढ़ते वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण
शहर में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं:
- औद्योगिक उत्सर्जन: जाजमऊ, दादानगर और पनकी औद्योगिक क्षेत्र की टैनरी व फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं
- वाहनों का अत्यधिक दबाव: पुराने डीज़ल वाहन और ट्रैफिक जाम से PM2.5 व NO₂ में वृद्धि
- निर्माण कार्य व रोड डस्ट: अधूरे सड़क निर्माण और खुले मलबे से PM10 का स्तर बढ़ा
- सर्दियों का असर (Weather Inversion): ठंडी हवा और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक जमीन के पास फँस जाते हैं
- क्रोमियम संदूषण: फरवरी 2026 की हालिया रिपोर्टों में कानपुर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में क्रोमियम के खतरनाक स्तर की पुष्टि हुई है, जो धूल के माध्यम से हवा में मिलकर फेफड़ों और त्वचा के लिए जोखिम पैदा कर रहा है
🏥 स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव, डॉक्टरों की चेतावनी
लगातार ‘गंभीर AQI’ बने रहने से स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया है:
- दमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी के मरीजों के लिए स्थिति अत्यंत संवेदनशील
- बच्चों और बुज़ुर्गों में सांस फूलना, खांसी, आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत
- सुबह और शाम आउटडोर वॉक व व्यायाम से परहेज़
- बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग अनिवार्य
- घर के अंदर Air Purifier और वेंटिलेशन पर विशेष ध्यान
🏛️ प्रशासन और सरकार के ताज़ा कदम
- निगरानी और रिसर्च: IIT कानपुर और UPPCB द्वारा औद्योगिक इकाइयों व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की नियमित मॉनिटरिंग
- कचरा जलाने पर सख्ती: बिठूर और आसपास के क्षेत्रों में खुले में कचरा जलाने पर कड़ी कार्रवाई
- ग्रीन बेल्ट अभियान: मुख्य सड़कों और हाईवे किनारे नीम, पीपल और अर्जुन जैसे धूल अवशोषित करने वाले पेड़ों का रोपण
- जन-जागरूकता: स्कूलों और कॉलोनियों में प्रदूषण से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान तेज
कानपुर में वायु प्रदूषण अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य आपात स्थिति की ओर इशारा कर रहा है। जब तक उद्योगों, ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण के साथ आम नागरिकों की भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार मुश्किल है।
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