मुंबई. पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों और भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भारतीय वित्तीय बाजार की कमर तोड़ दी है। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में आए ‘ब्लैक मंडे’ जैसे हालात ने निवेशकों के होश उड़ा दिए। कच्चे तेल की कीमतों में आए 23% के जोरदार उछाल ने न केवल सेंसेक्स और निफ्टी को धराशायी किया, बल्कि भारतीय रुपये को भी इतिहास के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है।
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,350 अंक टूटा
सप्ताह के पहले ही दिन दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का Sensex 1,352.74 अंक (1.71%) लुढ़क कर 77,566.16 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty 50 भी 422.40 अंक (1.73%) की गिरावट के साथ 24,028.05 के स्तर पर आ गया।
बाजार की इस गिरावट में निवेशकों की संपत्ति, जो BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन के रूप में मापी जाती है, उसमें करीब ₹12 लाख करोड़ की भारी कमी आई है।
इन सेक्टर्स पर गिरी गाज
बाजार में आई इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ा:
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बैंकिंग सेक्टर: Nifty Bank इंडेक्स में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई। निजी और सरकारी दोनों ही बैंकों के शेयरों में भारी बिकवाली रही।
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तेल और गैस (OMCs): कच्चे तेल के दाम बढ़ने से HPCL, BPCL और IOC जैसी कंपनियों के मार्जिन पर खतरा मंडराने लगा है, जिससे इनके शेयर 5-7% तक टूट गए।
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ऑटो सेक्टर: ईंधन महंगा होने की आशंका और सप्लाई चेन बाधित होने के डर से ऑटोमोबाइल शेयरों में भी बिकवाली हावी रही।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: पहली बार 92 के पार
डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल के आयात के लिए बढ़ती डॉलर की मांग ने रुपये को पस्त कर दिया है। सोमवार को भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.35 के स्तर पर पहुंच गया। यह रुपये के इतिहास का सबसे निचला स्तर है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चा तेल इसी तरह महंगा बना रहा, तो रुपया जल्द ही 93-94 के स्तर को भी छू सकता है, जिससे भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा।
कच्चा तेल $114 के पार: भारत के लिए क्यों है चिंता?
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई लाइन कटने का डर सता रहा है। Brent Crude की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 114 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। तेल की कीमतों में इस वृद्धि का सीधा असर:
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महंगाई (Inflation): माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ेंगे।
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चालू खाता घाटा (CAD): विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा।
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राजकोषीय घाटा: सरकार को सब्सिडी या टैक्स कटौती का सहारा लेना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय: क्या करें निवेशक?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, “मौजूदा समय में अनिश्चितता बहुत अधिक है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश जैसे सोने (Gold) में लगा रहे हैं।”
प्रमुख सलाह:
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छोटे निवेशकों को भारी भरकम निवेश से बचना चाहिए।
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पोर्टफोलियो में विविधता लाएं और ‘Wait and Watch’ की रणनीति अपनाएं।
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डिफेंसिव सेक्टर्स जैसे IT या फार्मा पर नजर रख सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में शांति बहाली ही अब बाजारों के लिए एकमात्र सहारा है। यदि आने वाले दिनों में तनाव कम नहीं होता, तो निफ्टी के लिए 23,500 और सेंसेक्स के लिए 75,000 का स्तर एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
निवेशकों के लिए टिप्स: matribhumisamachar.com/investing/share-market-tips-for-beginners
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