लखनऊ | गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना नूर अहमद अजहरी को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज उस आपराधिक मामले को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उन पर धार्मिक उन्माद फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं।
जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अभियुक्त के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, वे प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं है और अब यह मामला निचली अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तय किया जाएगा।
क्या था विवादित बयान और पूरा मामला?
यह विवाद 15 अप्रैल 2023 को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के बाद शुरू हुआ था। मौलाना नूर अहमद अजहरी ने एक सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए इस हत्याकांड को कथित तौर पर “उत्तर प्रदेश सरकार की एक सुनियोजित साजिश” करार दिया था।
मौलाना ने अपने बयान में यह भी दावा किया था कि भाजपा शासित राज्यों में एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और संविधान को “कुचला” जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद, पीलीभीत के पूरनपुर थाने के प्रभारी ने इसे सांप्रदायिक शांति के लिए खतरा मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने अपनी जांच में मौलाना के बयानों को IPC की धारा 505(2) (विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता पैदा करने वाले बयान) के तहत अपराध माना और पीलीभीत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी किए जाने के बाद, मौलाना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी:
“इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि मामला नहीं बनता। बयान की प्रकृति ऐसी है जो शांति व्यवस्था को भंग कर सकती है और लोगों को सरकार के प्रति नफरत या दंगों के लिए उकसा सकती है।”
अतीक-अशरफ हत्याकांड: एक फ्लैशबैक
प्रयागराज के कोल्विन अस्पताल के पास जब अतीक और अशरफ को मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था, तब तीन हमलावरों ने मीडियाकर्मी बनकर बेहद करीब से उन पर गोलियां चलाई थीं। यह पूरी घटना नेशनल टेलीविजन पर लाइव प्रसारित हुई थी। इस घटना ने देशभर में कानून-व्यवस्था पर बहस छेड़ दी थी और इसी संवेदनशीलता के कारण मौलाना के बयान को पुलिस ने “भड़काऊ” की श्रेणी में रखा।
हाइलाइट्स:
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना नूर अहमद अजहरी की याचिका की खारिज।
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मौलाना पर अतीक-अशरफ हत्याकांड को ‘सरकारी साजिश’ बताने का है आरोप।
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जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने कहा- “मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर साक्ष्य मौजूद”।
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अब पीलीभीत की ट्रायल कोर्ट में चलेगा आपराधिक मुकदमा।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब ट्रायल की राह साफ हो गई है। मौलाना नूर अहमद अजहरी को अब पीलीभीत की ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा। यदि ट्रायल के दौरान आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें जेल की सजा या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उनके पास इस फैसले को उच्च पीठ या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प भी खुला है।
Matribhumisamachar


