शाहजहांपुर | शनिवार, 11 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पिछले साल उजागर हुए कथित अवैध मतांतरण रैकेट में पुलिस ने अपनी जांच की कमान कस दी है। विदेशी फंडिंग और संगठित नेटवर्क के पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की अंतिम तैयारी में है। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि धर्म परिवर्तन के इस खेल के पीछे अमेरिका के टेक्सास की एक एजेंसी से मोटी रकम भेजी जा रही थी।
विदेशी फंडिंग का ‘कानपुर कनेक्शन’
पुलिस की विवेचना में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य वित्तीय केंद्र कानपुर था। अमेरिका के टेक्सास स्थित एक संदिग्ध एजेंसी से भारी भरकम राशि कानपुर निवासी सैमुअल सिंह उर्फ लकी के बैंक खातों में भेजी जाती थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार:
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सैमुअल सिंह इन पैसों को शाहजहांपुर के स्थानीय एजेंटों के खातों में किश्तों में ट्रांसफर करता था।
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स्थानीय आरोपी सुनीता के बैंक खाते में लगभग 20 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
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पूछताछ में सुनीता ने इन पैसों का कोई ठोस वैधानिक आधार पेश नहीं किया, जिससे विदेशी फंडिंग की पुष्टि और गहरी हो गई है।
प्रार्थना सभा से ‘प्रचारक’ तक का नेटवर्क
अवैध मतांतरण का यह मॉड्यूल बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। तारीन गाड़ीपुरा निवासी हरजीत और उसकी पत्नी सुनीता अपने घर को एक केंद्र के रूप में इस्तेमाल करते थे।
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चमत्कारी इलाज का दावा: आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू परिवारों को यह कहकर गुमराह किया जाता था कि ईसा मसीह की प्रार्थना से असाध्य बीमारियां दूर हो जाएंगी।
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आर्थिक प्रलोभन: हर रविवार होने वाली सभा में आने वालों को नकद राशि और राशन की मदद दी जाती थी।
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नौकरी का झांसा: धर्म परिवर्तन करने वालों को मोटी रकम और सरकारी जैसी स्थाई नौकरी का आश्वासन दिया जाता था।
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चेन मार्केटिंग मॉडल: जो लोग मतांतरित हो जाते थे, उन्हें ‘प्रचारक’ का पद देकर इस नेटवर्क को और फैलाने की जिम्मेदारी दी जाती थी।
हिंदू युवा वाहिनी की शिकायत पर हुई थी छापेमारी
इस रैकेट का पर्दाफाश सितंबर 2025 में हुआ था, जब हिंदू युवा वाहिनी के नगर अध्यक्ष अभिषेक तिवारी ने पुलिस में साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने तब मौके पर छापेमारी कर कई लोगों को हिरासत में लिया था और भारी मात्रा में प्रचार सामग्री जब्त की थी।
कानूनी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
शाहजहांपुर पुलिस के मुताबिक, मामले की विवेचना अब अंतिम चरण में है।
“हमने सैमुअल सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए हैं। बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल्स और गवाहों के बयान चार्जशीट का मुख्य आधार हैं। जल्द ही इसे सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।”
हालांकि, सैमुअल सिंह की गिरफ्तारी अब तक इसलिए नहीं हुई है क्योंकि संबंधित धाराओं में सजा का प्रावधान सात वर्ष से कम है, जिसके चलते उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर जांच में शामिल किया गया है। पुलिस अब उस अमेरिकी एजेंसी की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिसने फंड मुहैया कराए थे।
उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत इस मामले में कठोर कार्रवाई की उम्मीद है, क्योंकि प्रलोभन और विदेशी धन का उपयोग कर मतांतरण कराना कानूनन संगीन अपराध की श्रेणी में आता है।
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