मुंबई । गुरुवार, 9 जुलाई 2026
अगर आप इस साल अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आयकर विभाग ने करदाताओं के लिए नियमों को पहले से कहीं अधिक सख्त और पारदर्शी बना दिया है। ITR यूटिलिटी में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनकी अनदेखी करने पर आपको सीधे आयकर विभाग से नोटिस मिल सकता है।
इस बार विभाग का पूरा ध्यान आपकी कर-मुक्त आय (Exempt Income) और धारा 80G के तहत किए गए दावों पर है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार रिटर्न भरते समय आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा।
1. ITR में नया “Other Income” कॉलम: अब हर कमाई का देना होगा हिसाब
आयकर विभाग ने ITR फॉर्म में एक नया ‘Other Income’ (अन्य आय) कॉलम जोड़ दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि करदाता अपनी ऐसी आय का विवरण भी स्पष्ट रूप से दें, जिस पर भले ही टैक्स न लगता हो, लेकिन विभाग को सूचित करना अनिवार्य है।
अब तक कई करदाता कर-मुक्त आय को ITR में दिखाना छोड़ देते थे। लेकिन अब नए कॉलम के तहत आपको निम्नलिखित जानकारियों को विस्तार से दर्ज करना होगा:
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कृषि आय (Agricultural Income): यदि आपकी खेती से कोई कमाई होती है, तो उसे छिपाएं नहीं।
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टैक्स-फ्री बॉन्ड से ब्याज: HUDCO, REC या NHAI जैसे टैक्स-फ्री बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज की पूरी रिपोर्टिंग करनी होगी।
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कर-मुक्त उपहार (Exempt Gifts): शादी-ब्याह या करीबियों से मिले ऐसे उपहार जो टैक्स के दायरे से बाहर हैं, उनकी जानकारी भी अब पारदर्शी तरीके से देनी होगी।
2. धारा 80G और 80GGC के तहत दान (Donation) पर नए सख्त नियम
अगर आप किसी सामाजिक संस्था या राजनीतिक दल को दान देकर टैक्स छूट (Tax Deduction) का दावा करते हैं, तो अब केवल रसीद होना काफी नहीं होगा। फर्जी दावों को रोकने के लिए विभाग ने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है:
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धारा 80G (धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं): अब आपको दान प्राप्त करने वाली संस्था के नाम और PAN के साथ-साथ उनका IFSC कोड और आपके द्वारा किए गए भुगतान की लेनदेन संदर्भ संख्या (Transaction Reference Number या UTR) भी अनिवार्य रूप से दर्ज करनी होगी।
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धारा 80GGC (राजनीतिक दल): यदि आपने किसी राजनैतिक दल को चंदा दिया है, तो उस राजनैतिक दल का सटीक नाम और उनका PAN (Permanent Account Number) बताना अब कानूनन अनिवार्य है।
3. ITR दाखिल करने से पहले करदाता बरतें ये सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटर्न फाइलिंग के दौरान जरा सी भी विसंगति (Mismatch) होने पर स्क्रूटनी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सबमिट बटन दबाने से पहले इन तीन चीजों का मिलान अवश्य करें:
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AIS (Annual Information Statement): आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के लेनदेन और डिविडेंड की पूरी हिस्ट्री इसमें होती है। इसे अपने रिटर्न से जरूर मिलाएं।
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Form 26AS: यह सुनिश्चित करें कि आपकी कंपनी या बैंक द्वारा काटा गया TDS इसमें पूरी तरह से रिफ्लेक्ट हो रहा हो।
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Form 16: नौकरीपेशा लोग अपने फॉर्म 16 के आंकड़ों का मिलान AIS से जरूर कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या टैक्स-फ्री आय पर जानकारी देने से टैक्स लग सकता है?
उत्तर: नहीं, टैक्स-फ्री आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। आयकर विभाग केवल डेटा की गुणवत्ता (Data Quality) और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह जानकारी मांग रहा है।
Q2. UTR नंबर क्या होता है और यह कहाँ मिलेगा?
उत्तर: UTR (Unique Transaction Reference) नंबर तब जेनरेट होता है जब आप NEFT, RTGS या IMPS के जरिए ऑनलाइन ट्रांसफर करते हैं। यह आपके बैंक स्टेटमेंट या पासबुक में मिल जाएगा।
Q3. अगर मैंने दान की गलत जानकारी दी तो क्या होगा?
उत्तर: गलत या अधूरी जानकारी देने पर आपका डिडक्शन का दावा खारिज किया जा सकता है और आयकर अधिनियम के तहत जुर्माना या स्पष्टीकरण का नोटिस आ सकता है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। टैक्स नियमों में बदलाव और अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति के अनुसार सटीक फाइलिंग के लिए कृपया किसी प्रमाणित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें।
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