कोलकाता । गुरुवार, 9 जुलाई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची बगावत अब खुलकर सामने आ गई है। इसी कड़ी में गुरुवार को एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले तीन पूर्व राज्यसभा सदस्यों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक—ने आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया।
कोलकाता के साल्टलेक स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में इन तीनों वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। शमिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं को भाजपा का झंडा थमाकर पार्टी में उनका स्वागत किया।
राज्यसभा की मिल सकती है टिकट: 24 जुलाई को उपचुनाव
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि इन तीनों नेताओं के इस्तीफे के कारण खाली हुई राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव में भाजपा इन्हें ही अपना उम्मीदवार बना सकती है। चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के ठीक दो दिन बाद यह दलबदल हुआ है। राज्य विधानसभा के मौजूदा संख्या बल और समीकरणों को देखते हुए इन तीनों सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
टीएमसी में बड़ी बगावत: 20 सांसद और 60 से ज्यादा विधायक हुए अलग
बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण चल रहा है। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इससे पहले भी टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में शामिल हो चुके हैं और एनडीए (NDA) का हिस्सा बन चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी के 80 में से 60 से अधिक विधायक एक अलग गुट बनाकर ममता बनर्जी से नाता तोड़ चुके हैं।
क्या है भाजपा का ‘अच्छी तृणमूल’ वाला राजनीतिक सिद्धांत?
राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद यह पहला मौका है जब टीएमसी के इतने बड़े स्थापित नेताओं को भाजपा में शामिल किया गया है। इस घटनाक्रम ने भाजपा के पुराने ‘अच्छी तृणमूल’ वाले सिद्धांत को दोबारा चर्चा में ला दिया है।
पहले जहां भाजपा ने टीएमसी के नेताओं के लिए अपने दरवाजे बंद करने की बात कही थी, वहीं अब पार्टी ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इसे एक ‘अपवाद’ बताते हुए साफ किया कि पार्टी की मूल नीति नहीं बदली है। भाजपा का नया रणनीतिक रुख यह है कि:
तृणमूल कांग्रेस के वे नेता जो व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, नौकरी बेचने के घोटालों या जनता पर किए गए अत्याचारों में शामिल नहीं रहे हैं और जिनकी छवि साफ-सुथरी है, उनका भाजपा में स्वागत किया जाएगा।
शामिल हुए नेताओं ने पूर्ववर्ती सरकार को घेरा
भाजपा की सदस्यता लेने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखे हमले किए। सुष्मिता देव ने जहां टीएमसी के भीतर ‘अकल्पनीय भ्रष्टाचार’ होने का दावा किया और खुद को बेदाग बताया, वहीं सुखेंदु शेखर राय ने भी पूर्ववर्ती सरकार की वित्तीय गड़बड़ियों और नीतियों पर जमकर निशाना साधा।
भाजपा में शामिल हुए नेताओं का राजनीतिक सफर:
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सुष्मिता देव: मूल रूप से असम से आने वाली सुष्मिता देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं। वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्तर की बड़ी नेता रह चुकी हैं।
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सुखेंदु शेखर राय: वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय भी पहले कांग्रेस में थे और साल 2011 में टीएमसी के सत्ता में आने पर उससे जुड़े थे। टीएमसी ने साल 2023 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेजा था।
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प्रकाश चिक बराइक: उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्र से आने वाले प्रकाश चिक बराइक एक बेहद प्रभावशाली आदिवासी चेहरा हैं। टीएमसी ने उन्हें साल 2023 में पहली बार राज्यसभा भेजा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति टीएमसी के भीतर मौजूद स्वच्छ छवि वाले वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं को तोड़कर अपने साथ मिलाने की है, ताकि वह खुद को राज्य में एक मजबूत, समावेशी और सर्वव्यापी विकल्प के रूप में स्थापित कर सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: हाल ही में टीएमसी के कौन से तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हुए हैं?
उत्तर: सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है।
प्रश्न 2: बंगाल में राज्यसभा की इन सीटों पर उपचुनाव कब होने जा रहे हैं?
उत्तर: चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, खाली हुई इन तीनों सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं।
प्रश्न 3: भाजपा का ‘अच्छी तृणमूल’ (Good TMC) सिद्धांत क्या है?
उत्तर: इस सिद्धांत के तहत भाजपा केवल उन्हीं टीएमसी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करेगी, जिनकी छवि पूरी तरह साफ-सुथरी है और जो व्यक्तिगत रूप से किसी भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी या जनता पर अत्याचार के मामलों में संलिप्त नहीं रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल राजनीतिक समाचारों और मौजूदा घटनाक्रमों के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए विचार और आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल की छवि को प्रभावित करना नहीं है।
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