नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव के बीच, नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर 9 जनवरी को नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। वे 12 जनवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभालेंगे। उनका यह आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच रूसी तेल और नए टैरिफ नियमों को लेकर खींचतान जारी है।
भारत आगमन पर गर्मजोशी भरा संदेश
राजदूत गोर ने भारत पहुँचते ही सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने पोस्ट किया:
“भारत वापस आकर बहुत अच्छा लगा! हमारे दोनों देशों के लिए आगे अविश्वसनीय अवसर हैं!”
गौरतलब है कि सर्जियो गोर को नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ दिलाई गई थी। उनकी नियुक्ति को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को भारत में आगे बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
तेल और टैरिफ: सबसे बड़ी चुनौती
राजदूत गोर की भारत यात्रा एक विवादास्पद अमेरिकी विधेयक की पृष्ठभूमि में हो रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसमें रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर कम से कम 500% टैरिफ लगाने का कड़ा प्रावधान है।
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उद्देश्य: इस भारी-भरकम टैरिफ का मुख्य लक्ष्य भारत और चीन जैसे देशों को रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने से रोकना है।
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प्रभाव: यदि यह लागू होता है, तो इससे भारत के निर्यात और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है।
व्यापार समझौते की उम्मीद
तनाव के बावजूद, राजदूत गोर ने सकारात्मक संकेत भी दिए हैं। उन्होंने पहले संकेत दिया था कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते (Trade Deal) पर बातचीत अपने अंतिम चरण में है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गोर के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने में मदद करेगा।
गोर की प्राथमिकताएं
राजदूत के रूप में सर्जियो गोर के सामने कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं:
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ऊर्जा निर्यात: भारत को रूसी तेल से दूर कर अमेरिकी ऊर्जा (विशेषकर LNG) का निर्यात बढ़ाना।
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सुरक्षा सहयोग: रक्षा और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करना।
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आर्थिक संबंध: टैरिफ विवादों को सुलझाकर व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देना।
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