नई दिल्ली. साहित्य प्रेमियों के लिए साल के सबसे बड़े उत्सव का आगाज़ हो चुका है। राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आज 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का औपचारिक उद्घाटन किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दीप प्रज्वलित कर इस नौ-दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ की शुरुआत की।
वीरता और ज्ञान का अनूठा संगम: मुख्य थीम
इस वर्ष का मेला भारतीय सेना के गौरव को समर्पित है। मेले की थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और ज्ञान @ 75” रखी गई है। थीम पवेलियन में आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण हैं:
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भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास और शौर्य गाथाओं पर आधारित 500 से अधिक पुस्तकें।
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रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाने वाले अर्जुन टैंक, INS विक्रांत और LCA तेजस की भव्य प्रतिकृतियां।
मेले की खास बातें: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| अवधि | 10 से 18 जनवरी, 2026 |
| समय | सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क (सभी आगंतुकों के लिए) |
| सहभागी | 35+ देश और 1,000 से अधिक प्रकाशक |
| सम्मानित अतिथि (Guest of Honour) | कतर (Qatar) |
| फोकस देश (Focus Country) | स्पेन (Spain) |
डिजिटल साक्षरता की नई पहल
इस वर्ष का मेला न केवल मुद्रित पुस्तकों बल्कि डिजिटल भविष्य की ओर भी एक बड़ा कदम है। ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय’ (National e-Library) के माध्यम से पाठकों को एक विशेष सौगात दी गई है। इसके अंतर्गत:
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23 से अधिक भाषाओं में सामग्री उपलब्ध है।
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6,000 से अधिक मुफ्त ई-बुक्स को पाठक डिजिटल रूप से एक्सेस कर सकते हैं।
वैश्विक मंच पर भारतीय साहित्य
मेले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती धमक साफ दिखाई दे रही है। कतर को ‘सम्मानित अतिथि देश’ और स्पेन को ‘फोकस देश’ के रूप में आमंत्रित किया गया है, जिससे पाठकों को विदेशी साहित्य और संस्कृति से जुड़ने का सीधा अवसर मिलेगा।
“यह पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विचारों का आदान-प्रदान और हमारी सांस्कृतिक व सैन्य विरासत का उत्सव है।” — धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री
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