लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी माता के खिलाफ बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम की कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में तनाव और आक्रोश का माहौल है। इस मामले में पुलिस ने अब तक प्रदेश भर में 84 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं, जबकि दक्षिणपंथी संगठनों ने मौलाना की तत्काल गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है।
पोस्टर वार और 11 मार्च का अल्टीमेटम
मंगलवार सुबह लखनऊ के हजरतगंज, परिवर्तन चौक और भाजपा प्रदेश कार्यालय के आसपास के इलाकों में विवादित पोस्टर देखे गए। इन पोस्टरों में मौलाना के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की गई है और जनता से 11 मार्च (बुधवार) को हजरतगंज स्थित गांधी पार्क में जुटने की अपील की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, ये पोस्टर स्थानीय पार्षद स्वदेश सिंह की ओर से लगवाए गए हैं। हालांकि, माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और नगर निगम की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिकांश पोस्टरों को हटा दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई
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विवाद की जड़: बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम ने एक हालिया धार्मिक सभा में सीएम योगी, उनकी माता और गौकशी कानूनों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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एफआईआर: बलरामपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा की तहरीर पर मौलाना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (अपमान) और 353-2 (जनता को गुमराह करना) के तहत केस दर्ज किया गया है।
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संत समाज में रोष: अयोध्या और वाराणसी के संत समाज ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे सनातन संस्कृति का अपमान करार दिया है।
प्रशासन अलर्ट पर
कल होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए लखनऊ प्रशासन ने गांधी पार्क और उसके आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या शहर की शांति व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोशल मीडिया सेल के माध्यम से भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
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