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सुरक्षा के नाम पर डॉ. परवेज मालिक ने खरीदी अवैध पिस्टल, बिजनौर पुलिस ने एमडी चिकित्सक को भेजा जेल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुरादाबाद के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी डॉक्टर के पास से पुलिस ने एक अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं। मंगलवार को न्यायालय में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

हथियार तस्करों से मिला सुराग

इस मामले का खुलासा सोमवार को हुई एक बड़ी कार्रवाई के बाद हुआ। नगीना, धामपुर और स्योहारा पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक गिरोह के आठ सदस्यों को दबोचा था। पुलिस पूछताछ में गिरोह के सदस्य शमीम उर्फ माइकल ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसने एक पिस्टल मुरादाबाद के छजलैट क्षेत्र में अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर को बेची है।

40 हजार में खरीदी थी पिस्टल

माइकल से मिली जानकारी के आधार पर स्योहारा पुलिस ने मुरादाबाद के कांठ रोड निवासी डॉ. परवेज मालिक (पुत्र मोहम्मद आकिल) को हिरासत में लिया। स्योहारा थाना प्रभारी संजय कुमार के अनुसार, डॉ. परवेज एमबीबीएस और एमडी की डिग्री धारक हैं। उन्होंने अपनी और अस्पताल की सुरक्षा का हवाला देते हुए हथियार तस्करों से 40,000 रुपये में यह पिस्टल खरीदी थी।

अमरोहा के फैक्ट्री में बनी थी पिस्टल

पुलिस जांच में सामने आया कि यह पिस्टल अमरोहा जिले के नौगांवा सादात स्थित नई बस्ती निवासी आरिफ ने अपनी अवैध फैक्ट्री में बनाई थी। आरिफ इस गिरोह का सरगना है जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

डॉक्टर का तर्क: सुरक्षा के लिए उठाया कदम

पूछताछ के दौरान डॉक्टर ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए कहा कि उनके पास कोई लाइसेंसी हथियार नहीं था। अस्पताल और स्वयं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शॉर्टकट अपनाकर अवैध हथियार खरीदने की गलती की।

पुलिस की अपील:

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के नाम पर भी अवैध हथियार रखना गंभीर अपराध है। यदि किसी व्यक्ति को जान का खतरा है, तो उसे नियमानुसार जिला प्रशासन के पास शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करना चाहिए।

matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।