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बिहार के आरा में बना ‘मिनी तिरुपति’, 10 महीने में तैयार हुआ दक्षिण भारतीय शैली का भव्य मंदिर; जानें क्या है खास

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पटना। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

बिहार की धार्मिक विरासत में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जिले के कोइलवर प्रखंड के बहियारा गांव में दक्षिण भारतीय शिल्पकला का बेजोड़ नमूना ‘श्री बालाजी नरसिंह मंदिर’ बनकर तैयार हो चुका है। इसे “बिहार का तिरुपति” कहा जा रहा है, क्योंकि इसकी बनावट और परंपराएं पूरी तरह से द्रविड़ शैली पर आधारित हैं।

🏛️ मुख्य आकर्षण: महाबलीपुरम की नक्काशी और अयोध्या का कनेक्शन

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी मूर्तियां हैं। मंदिर में स्थापित सभी प्रमुख विग्रह कृष्ण शिला पत्थर से बने हैं।

  • अरुण योगिराज का योगदान: ताजा जानकारी के अनुसार, मंदिर के मुख्य विग्रहों का निर्माण उसी कृष्ण शिला से हुआ है जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर की मूर्ति के लिए किया गया था। इन मूर्तियों को महाबलीपुरम (तमिलनाडु) के कुशल कारीगरों ने तराशा है।

  • द्रविड़ शैली: मंदिर का प्रवेश द्वार यानी ‘गोपुरम’ और इसकी दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी पूरी तरह से दक्षिण भारतीय मंदिरों की याद दिलाती है।

💰 लागत और रिकॉर्ड समय में निर्माण

यह मंदिर अपनी निर्माण गति के लिए भी चर्चा में है। जहाँ बड़े मंदिरों को बनने में वर्षों लगते हैं, वहीं:

  • लागत: करीब 10–11 करोड़ रुपये की लागत से इसे भव्य रूप दिया गया है।

  • समय: महज 10 महीने के रिकॉर्ड समय में इसका निर्माण कार्य पूरा किया गया।

  • संरक्षक: इस मंदिर के निर्माण में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा की विशेष भूमिका रही है, जिन्होंने अपने पैतृक गांव बहियारा में इसे बनवाया है।

🔔 9 अप्रैल से शुरू हुआ प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव

मंदिर में 9 अप्रैल से पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की शुरुआत हो चुकी है।

  • अनुष्ठान: 51 आचार्यों और तमिलनाडु से आए विशेष पुरोहितों की उपस्थिति में मृत्तिका संग्रह, यज्ञशाला प्रवेश और वेदपाठ जैसे अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं।

  • वैदिक मंत्रोच्चार: पूरा बहियारा गांव इस समय ‘गोविंदा-गोविंदा’ के जयघोष से गूंज रहा है।

🛐 कौन-कौन से भगवान होंगे विराजमान?

मंदिर परिसर में सात प्रमुख विग्रह स्थापित किए गए हैं:

  1. श्री तिरुपति बालाजी

  2. श्री लक्ष्मी नरसिंह भगवान

  3. श्री गणपति जी

  4. श्री बजरंग बली

  5. श्री गरुड़ जी

  6. श्री महालक्ष्मी जी

  7. श्री राम दरबार

🌏 ‘बैकुंठ धाम’: मिथिला और द्रविड़ संस्कृति का संगम

मंदिर के महंत स्वामी सम्भवाचार्य महाराज के अनुसार, इस मंदिर को “बैकुंठ धाम” के रूप में पहचाना जाएगा। यह न केवल बिहार के लोगों के लिए आस्था का केंद्र होगा, बल्कि उत्तर भारत (मिथिला/भोजपुरी) और दक्षिण भारत की संस्कृतियों के बीच एक सेतु का काम करेगा।

🚩 12 अप्रैल से आम जनता के लिए खुलेंगे कपाट

श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि 12 अप्रैल 2026 से मंदिर के पट आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।

विशेष व्यवस्था: मंदिर में नियमित पूजा-पाठ के लिए दक्षिण भारत के पंडितों को स्थायी रूप से नियुक्त किया गया है, ताकि यहां आने वाले भक्तों को तिरुपति जैसा ही आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।

क्यों खास है यह मंदिर? (Quick Facts)

विशेषता विवरण
शैली पूर्णतः द्रविड़ (दक्षिण भारतीय)
मुख्य पत्थर कृष्ण शिला (तमिलनाडु)
स्थान बहियारा गांव, कोइलवर (आरा)
प्रमुख आकर्षण भव्य गोपुरम और नक्काशी
खुलने की तिथि 12 अप्रैल, 2026

निष्कर्ष: भोजपुर का यह मंदिर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि बिहार के गौरवशाली इतिहास में कला और संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण भी पेश करेगा।

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