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Bhojshala Dispute: ‘एक बार मंदिर, हमेशा मंदिर’—हिंदू पक्ष ने हाई कोर्ट में दीं निर्णायक दलीलें; 24 घंटे पूजा की मांग

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भोपाल | शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

धार (मध्य प्रदेश): ऐतिहासिक भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही डे-टू-डे (नियमित) सुनवाई अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गई है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष गुरुवार को लगातार चौथे दिन हिंदू पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप निर्विवाद रूप से एक हिंदू मंदिर का है।

सुनवाई की 5 बड़ी बातें: हिंदू पक्ष के मुख्य तर्क

1. “एक बार मंदिर, तो हमेशा मंदिर”

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यदि किसी स्थान पर एक बार देवता की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाती है, तो वह स्थान ‘जुरिस्टिक पर्सन’ (कानूनी व्यक्ति) बन जाता है। उन्होंने कहा, “भले ही ढांचा तोड़ दिया गया हो, लेकिन देवता का अस्तित्व और उस स्थान का धार्मिक स्वरूप कभी समाप्त नहीं होता।”

2. नमाज पढ़ने से मस्जिद का दर्जा नहीं मिलता

हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि किसी सार्वजनिक स्थान या पुराने मंदिर के परिसर में केवल नमाज अदा करने से वह स्थान ‘मज्जिद’ नहीं बन जाता। उन्होंने तर्क दिया कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृत अध्ययन केंद्र और वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर है।

3. ASI सर्वे की 2000 पन्नों की रिपोर्ट का आधार

हाल ही में 98 दिनों तक चले अत्याधुनिक वैज्ञानिक सर्वे और 1902 के ऐतिहासिक एएसआई रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया गया कि:

  • परिसर के स्तंभों और दीवारों पर भगवान गणेश, ब्रह्मा, और नरसिंह की मूर्तियां मिली हैं।

  • सर्वे में त्रिशूल और अन्य सनातनी प्रतीकों की पुष्टि हुई है।

  • कार्बन डेटिंग से यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि मौजूदा ढांचे का निर्माण प्राचीन मंदिर के अवशेषों से किया गया है।

4. लंदन से वाग्देवी की प्रतिमा लाने की मांग

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने यह मांग भी दोहराई कि लंदन के म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में पुन: स्थापित किया जाए।

5. 2003 के आदेश में संशोधन की अपील

वर्तमान में लागू व्यवस्था (मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज) को चुनौती देते हुए हिंदू पक्ष ने मांग की है कि श्रद्धालुओं को 24 घंटे और सातों दिन निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना करने का अधिकार मिलना चाहिए।

अगली सुनवाई में क्या होगा?

गुरुवार को हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के तर्क पूरे होने के बाद, अब याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी अपनी दलीलें पेश करेंगे। इसके तुरंत बाद मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपना पक्ष रखेंगे। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह सभी पक्षों की आपत्तियों और एएसआई की वीडियोग्राफी का बारीकी से अवलोकन करने के बाद ही किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचेगा।

विशेष नोट: सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट को सभी पक्षों की आपत्तियों पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिससे अब इस 100 साल पुराने विवाद के कानूनी समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

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