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महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले प्रसाद सुरक्षा पर FDA सख्त: 12 हजार गणेश मंडलों के लिए जारी हुई 21-सूत्रीय SOP

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
मुंबई । 
गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने प्रशासनिक निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है। मुंबई सहित राज्यभर के करीब 12,000 सार्वजनिक गणेश मंडलों में बंटने वाले प्रसाद, महाप्रसाद, भंडारे और अन्नदान पर अब एफडीए अधिकारियों की सीधी नजर रहेगी।
हाल ही में इस्कॉन (ISKCON) जुहू से जुड़े कुछ खाद्य प्रतिष्ठानों और मुंबई के प्रमुख कैटरर्स पर एफडीए द्वारा की गई आकस्मिक जांच और निलंबन कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस पहल का मकसद धार्मिक आयोजनों में बाधा डालना नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं तक सुरक्षित और स्वच्छ भोजन पहुंचाना है।

21-सूत्रीय SOP और फेस्टिवल एनफोर्समेंट कैलेंडर लागू

महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे के निर्देशों के तहत इस वर्ष गणेशोत्सव को ‘Level-1 Festival’ की श्रेणी में रखा गया है। इसके अंतर्गत त्योहार शुरू होने से 21 दिन पहले से ही खाद्य सामग्री के उत्पादन, परिवहन, भंडारण और बिक्री बिंदुओं पर विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है।
एफडीए द्वारा जारी मुख्य दिशानिर्देश:
  1. रजिस्टर्ड विक्रेताओं से खरीदारी: मंडलों को महाप्रसाद या भंडारे के लिए कच्चा माल (दूध, घी, तेल, बेसन, मावा, सूखा मेवा, खाद्य रंग आदि) केवल FSSAI से पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खरीदना होगा।
  2. बिल और रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी: इस्तेमाल की गई सभी सामग्रियों के पक्के बिल और खरीद से जुड़ा रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर स्रोत की जांच की जा सके।
  3. कैटरर्स का पूर्व-पंजीकरण: यदि महाप्रसाद बनाने का काम किसी कैटरर को दिया गया है, तो उस कैटरर के पास एफडीए लाइसेंस होना आवश्यक है। इसके अलावा, आयोजन से कम से कम 7 दिन पहले संबंधित एफडीए कार्यालय में इसकी सूचना देना अनिवार्य किया गया है।
  4. स्वच्छता एवं जल सुरक्षा: प्रसाद बनाने वाले स्थान की स्वच्छता, शुद्ध पेयजल और बर्फ का उपयोग, तथा भोजन पकाने वाले कारीगरों की स्वच्छता मानकों की 21-सूत्रीय एसओपी के तहत सख्त निगरानी होगी।

गणेश मंडलों का रुख और प्रतिक्रिया

बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति (BSGSS) ने एफडीए के खाद्य सुरक्षा उपायों का स्वागत किया है। हालांकि, समिति ने प्रशासन से छोटे गणेश मंडलों के व्यावहारिक मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। समिति का कहना है कि बजट की सीमाओं के कारण छोटे मंडल महंगे लाइसेंसधारी कैटरर्स नियुक्त करने में असमर्थ हो सकते हैं, इसलिए एफडीए को सामान्य स्वयंसेवकों द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रसाद के लिए सरल दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: क्या हर छोटे गणेश मंडल को एफडीए से अनुमति लेनी होगी?
A: हां, यदि कोई मंडल सार्वजनिक रूप से महाप्रसाद, भंडारा या अन्नदान का आयोजन करता है, तो उसे एफडीए नियमों का पालन करना होगा और खाद्य सामग्री केवल FSSAI पंजीकृत विक्रेताओं से ही खरीदनी होगी।
Q2: प्रसाद बनाने वाली सामग्री के लिए कौन से दस्तावेज रखने जरूरी हैं?
A: मंडलों को दूध, तेल, बेसन, मावा, सूखे मेवे और मसालों की खरीद के पक्के बिल, विक्रेता का FSSAI लाइसेंस नंबर और भुगतान का रिकॉर्ड रखना होगा।
Q3: क्या घर पर बनाकर लाया गया प्रसाद मंडलों में बांटा जा सकता है?
A: श्रद्धालुओं द्वारा व्यक्तिगत रूप से लाया जाने वाला छोटा प्रसाद सामान्य रूप से स्वीकार्य है, लेकिन यदि बड़े पैमाने पर वितरण के लिए सामग्री तैयार की जा रही है, तो स्वच्छता और स्रोत की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

Disclaimer

यह लेख हालिया प्रशासनिक दिशानिर्देशों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। एफडीए के नियमों और आवेदनों की सटीक प्रक्रियाओं की नवीनतम जानकारी के लिए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) या FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।