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कानपुर लेम्बोर्गिनी केस: ड्राइवर का ‘सरेंडर दांव’ कोर्ट में फेल, पुलिस के इन 5 सबूतों ने फंसाया कारोबारी का बेटा

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कानपुर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा कथित ड्राइवर मोहन।

कानपुर: कानपुर के हाई-प्रोफाइल लेम्बोर्गिनी हादसे में बुधवार को उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के कथित ड्राइवर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण (Surrender) की अर्जी दी। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को आधार मानते हुए ड्राइवर की अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी शिवम मिश्रा है, न कि मोहन।

कोर्ट में ‘ड्राइवर थ्योरी’ का फ्लॉप शो

बुधवार दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का कथित ड्राइवर मोहन, अपने वकील नरेंद्र कुमार यादव के साथ कोर्ट पहुंचा। मोहन ने दावा किया कि हादसे के वक्त स्टीयरिंग उसके हाथ में था। उसने दलील दी:

“शिवम भैया को अचानक दौरा पड़ गया था, जिससे मैं घबरा गया और हादसा हो गया। जब भीड़ ने शीशा तोड़ा, तो मैं नीचे के रास्ते से निकलकर किनारे खड़ा हो गया था।”

हालांकि, जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस की जांच में शिवम मिश्रा ही मुख्य आरोपी है। कोर्ट ने ड्राइवर को आरोपी मानने से इनकार करते हुए कार को रिलीज करने की अर्जी भी फिलहाल टाल दी है।

🔍 पुलिस की तफ्तीश में ‘झूठ’ बेनकाब: 5 पुख्ता सबूत

ग्वालटोली थाने के दरोगा दिनेश कुमार ने कोर्ट में जो साक्ष्य पेश किए हैं, वे कारोबारी के दावों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं:

  1. डिजिटल एविडेंस (वीडियो): हादसे के तुरंत बाद का वीडियो साफ दिखाता है कि कार के अंदर सिर्फ एक व्यक्ति (शिवम) था। बाउंसरों ने ईंट से शीशा तोड़कर शिवम को ड्राइविंग सीट से बाहर निकाला।

  2. चश्मदीदों के बयान: घटनास्थल पर मौजूद 10 से ज्यादा गवाहों ने पुलिस को बताया कि गाड़ी में कोई ड्राइवर मौजूद नहीं था।

  3. मोबाइल टावर लोकेशन: हादसे के वक्त शिवम मिश्रा के मोबाइल की लोकेशन वीआईपी रोड (VIP Road) पर ही पाई गई है।

  4. CCTV फुटेज: नगर निगम और आसपास के कैमरों की फुटेज में कार में किसी दूसरे व्यक्ति की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले हैं।

  5. वादी का यू-टर्न: हालांकि अब घायल तौफीक समझौते की बात कर रहा है, लेकिन शुरुआती बयान और वीडियो पहचान में उसने शिवम को ही ड्राइवर बताया था।

राजनीतिक गलियारों में गूंजा मामला

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। आरोप लगा कि पुलिस रसूखदार कारोबारी के दबाव में है। इसी दबाव के बाद पुलिस ने 24 घंटे के भीतर FIR में अज्ञात की जगह शिवम मिश्रा का नाम जोड़ा।

कारोबारी का दावा बनाम पुलिस का तर्क

तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने पुलिस कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका बेटा निर्दोष है और वह सो रहा था। लेकिन पुलिस का दावा है कि “अगर कार अंदर से लॉक थी और ड्राइवर बाहर निकल गया था, तो फिर शीशा तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?” यह सवाल बचाव पक्ष को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल रहा है।

🛑 मुख्य बिंदु: एक नजर में

  • हादसा कब हुआ: रविवार, 8 फरवरी।

  • कितने घायल: 6 लोगों को लेम्बोर्गिनी ने कुचला।

  • मुख्य आरोपी: शिवम मिश्रा (तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा)।

  • वर्तमान स्थिति: कार पुलिस कस्टडी में, आरोपी के सरेंडर का इंतजार।

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